मई 13, 2013

सापेक्षतावाद सिद्धांत : विशेष सापेक्षतावाद


अब आप ब्रह्माण्ड के सभी बड़े खिलाड़ियों अर्थात अंतराल/अंतरिक्ष, समय, पदार्थ, गति, द्रव्यमान, गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा और प्रकाश से परिचित हो चुके है। विशेष सापेक्षतावाद के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि इन ब्रह्माण्ड के यह सभी सरल से लगने वाले मुख्य गुण-धर्म कुछ विशिष्ट “सापेक्षिक” स्थितियों में बहुत अप्रत्याशित तरीके से व्यवहार करते हैं। विशेष सापेक्षतावाद को समझने की कुंजी इन ब्रह्माण्ड के इन गुणधर्मो पर सापेक्षतावाद के प्रभाव में छीपी हुयी है।

संदर्भ बिंदु (Frames of Reference)

relativity2आइंस्टाइन का विशेष सापेक्षतावाद का सिद्धांत “संदर्भ बिंदु” की धारणा पर आधारित है। संदर्भ बिंदु का अर्थ है एक ऐसी जगह जहां पर “व्यक्ति/निरीक्षक खड़ा” है। आप इस समय संभवतः अपने कंप्यूटर के सामने बैठे है। यह आपका वर्तमान संदर्भ बिंदु है। आपको महसूस हो रहा है कि आप स्थिर है, लेकिन आप जिस पृथ्वी पर है वह अपने अक्ष पर घूम रही है और सूर्य कि परिक्रमा कर रही है। संदर्भ बिंदु के संबंध मे सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि “हमारे ब्रह्मांड में अपने आप में संपूर्ण संदर्भ बिंदु के रूप में ऐसी कोई चीज नहीं है।” जब हम अपने आप में संपूर्ण संदर्भ बिंदु कहते है; तब हमारा तात्पर्य होता है पूरी तरह से स्थिर जगह और संपूर्ण ब्रह्माण्ड में ऐसी कोई जगह नहीं है। इस कथन का अर्थ है कि सभी वस्तुये गतिमान है अर्थात सभी गतियां सापेक्ष है। ध्यान दिजिये कि  आप एक जगह स्थिर है लेकिन  पृथ्वी गतिमान है इसलिए आप भी गतिमान हैं। आप अंतरिक्ष और समय मे हमेशा गतिमान रहते हैं। संपूर्ण ब्रह्माण्ड मे कोई भी जगह/पिंड स्थिर नहीं है इसलिए गति के मापन/निरीक्षण के मानकीकरण के लिये कोई मूल संदर्भ बिंदु नहीं है। यदि राम श्याम कि दिशा मे दौडता है, इसे दो तरह से देखा जा सकता है। श्याम के परिप्रेक्ष्य में राम उसके समीप आ रहा है जबकि राम के परिप्रेक्ष्य श्याम उसके समीप आ रहा है। राम और श्याम दोनो को अपने संदर्भ बिंदु के परिप्रेक्ष्य मे निरीक्षण करने का अधिकार है। हर गति आपके संदर्भ बिंदु के सापेक्ष होती है। एक दूसरा उदाहरण, यदि आप एक गेंद को फेंकते है , तब गेंद को अधिकार है कि वह अपने संदर्भ बिंदु से अपने आप को स्थिर और आपको गतिमान समझे। गेंद मान सकती है कि आप उससे दूर जा रहे है जबकि आप देख रहे है कि गेंद आपसे दूर जा रही है। ध्यान मे रखिये कि आप पृथ्वी के धरातल के सापेक्ष गति नही कर रहे हैं लेकिन आप पृथ्वी के साथ गतिमान हैं।

विशेष सापेक्षतावाद का प्रथम नियम

विशेष सापेक्षतावाद का प्रथम नियम सरल है और इसे समझने मे कोई कठिनाई नहीं है।

भौतिकी के नियम सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये सत्य होते है।

सापेक्षतावाद की अवधारणाओं मे यह सबसे सरल और आसान है। यह नियम हमें समझाता है कि क्यों और कैसे प्रकृति हमसे हमेशा एक जैसे ही व्यवहार करती है। यह हमें भौतिकी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने और उनके परिणामों को जानने मे मदद करता है। यदि आप एक ईंट और एक इंचीटेप को लेकर ईंट की लंबाई का मापन करे करें तो आपको हमेशा एक ही परिणाम मिलेगा चाहे आप यह मापन जमीन पर स्थिर होकर करें या बस पर सवार होकर करें। अब आप एक पेंडुलम के १० दोलन में लगने वाले समय को एक स्थिर जगह पर मापें, उसके बाद यही मापन आप बस पर सवार होकर करें आपको समान परिणाम मिलेंगे। ध्यान दें कि हम यह मान कर चल रहे हैं कि बस एक सपाट सड़क पर समान गति से चल रही है, उसकी गति मे कोई परिवर्तन(त्वरण) नहीं आ रहा है। अब हम एक जगह पर स्थिर रह कर इन प्रयोगों को दोहराते है, इस बार ईंट/पेंडुलम बस पर सवार है और हम जमीन पर स्थिर हैं। हमे पिछले परिणामों से भिन्न परिणाम मिलेंगे। इन दोनो प्रयोगों के परिणामों मे अंतर इसलिए है क्योंकि भौतिकी के नियम सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये समान है। जब हम विशेष सापेक्षतावाद के दूसरे नियम की चर्चा करेंगे यह और स्पष्ट हो जायेगा। यह महत्वपूर्ण है कि भौतिकी के नियम स्थिर है इसका अर्थ यह नही है कि हमे भिन्न संदर्भ बिंदुओं पर एक ही प्रायोगिक परिणाम मिलेगा। परिणाम हमारे प्रयोग के प्रकार पर निर्भर है। यदि हम दो कारो को टकरायें तब इस टकराव की कुल ऊर्जा का संरक्षण होगा, हम कार मे हों या कार से बाहर फुटपाथ पर इसका टकराव के कुल ऊर्जा की मात्रा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऊर्जा के संरक्षण का नियम भौतिकी का नियम है और यह सभी संदर्भ बिंदुओ के लिये समान रहेगा।

विशेष सापेक्षतावाद का द्वितीय नियम

विशेष सापेक्षतावाद का दूसरा नियम काफी विचित्र और अनपेक्षित है। यह सामान्य बुद्धि और तर्क के विपरीत है! यह नियम है -

सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये प्रकाश गति स्थिरांक है।

वास्तविकता में यह सापेक्षतावाद का पहला नियम ही है , केवल शब्दों का हेर-फेर है। यदि भौतिकी के नियम सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये समान है, तब प्रकाश गति सभी संदर्भ बिंदुओं के लिये समान ही होना चाहीये।

इसमें विचित्र क्या है ?
relativity3 एक उदाहरण लेते है। श्याम एक स्थान पर खडा है और राम श्याम से दूर 6 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ रहा है। श्याम के संदर्भ मे राम की गति 6 किमी/घंटा होगी। जबकि राम के संदर्भ मे उसकी स्वयं की गति शून्य होगी। स्वयं के संदर्भ मे स्वयं की गति हमेशा शून्य होती है। अब राम दौड़ते हुये एक गेंद 10 किमी प्रति/घंटा की गति से फेंकता है। राम ने गेंद फेंकी है, इसलिए उसके संदर्भ में गेंद की गति 10 किमी/घंटा होगी। लेकिन श्याम एक जगह स्थिर है, इसलिए उसके संदर्भ मे गेंद की गति मे राम की गति भी जुड जायेगी।

श्याम के अनुसार गेंद की गति = 10 किमी/घंटा + 6 किमी/घंटा = 16 किमी/घंटा

है ना सामान्य तर्क बुद्धी वाली बात!

relativity4लेकिन प्रकाश की गति मे यह सामान्य तर्क बुद्धी लागू नहीं होती है। इसी उदाहरण में अब हम राम के हाथ में जलती हुयी टार्च दे देते है। वह गेंद की बजाय प्रकाश फेंक रहा है। राम के संदर्भ में प्रकाश की गति C अर्थात 299,792,458 मीटर/सेकंड होगी। लेकिन श्याम के संदर्भ मे प्रकाश की गति क्या होगी ?

सामान्य तर्क के अनुसार श्याम के संदर्भ में प्रकाश गति = C + 6 किमी/घंटा होना चाहीये! (C=299,792,458 मीटर/सेकंड)
लेकिन विशेष सापेक्षतावाद के दूसरे नियम के अनुसार श्याम के संदर्भ में भी प्रकाश गति C अर्थात 299,792,458 मीटर/सेकंड ही होगी, उसमें राम की गति नहीं जुडेगी।

अब इस पर थोडा दिमाग पर जोर डालीये। विशेष सापेक्षतावाद के दूसरे नियम के बारे में और चर्चा अगले लेख में….

मई 6, 2013

सापेक्षतावाद सिद्धांत : प्रकाश के गुणधर्म


प्रकाश (सूर्य)

प्रकाश ऊर्जा का ही एक रूप है। प्रकाश का व्यवहार थोड़ा विचित्र है। न्युटन के कारपसकुलर अवधारणा(corpuscular hypothesis) के अनुसार प्रकाश छोटे छोटे कणों (जिन्हें न्युटन ने कारपसकल नाम दिया था।) से बना होता है। न्युटन का यह मानना प्रकाश के परावर्तन(reflection) के कारण था क्योंकि प्रकाश एक सरल रेखा मे परावर्तित होता है और यह प्रकाश के छोटे कणों से बने होने पर ही संभव है। केवल कण ही एक सरल रेखा मे गति कर सकते है।

थामस यंग का प्रकाश अपवर्तन दिखाता डबल-स्लिट प्रयोग जिसने प्रकाश के तरंग होने की पुष्टि की थी।

लेकिन उसी समय क्रिस्चियन हायजेन्स( Christian Huygens) और थामस यंग( Thomas Young) के अनुसार प्रकाश तरंगो से बना होता था। हायजेन्स और यंग का सिद्धांत प्रकाश के अपवर्तन(refraction) पर आधारित था, क्योंकि माध्यम मे परिवर्तन होने पर प्रकाश की गति मे परिवर्तन आता था, यह प्रकाश के तरंग व्यवहार से ही संभव था। न्युटन के कारपसकुलर अवधारणा के ताबूत मे अंतिम कील मैक्सवेल(James Clerk Maxwell) ने ठोंक दी थी, उनके चार सरल समीकरणों ने सिद्ध कर दिया कि प्रकाश विद्युत-चुंबकिय क्षेत्र की स्वयं प्रवाहित तरंग( self-propagating waves) मात्र है। इन समीकरणों से प्रकाश की गति की सटीक गणना भी हो गयी थी। लेकिन २० वी शताब्दि मे फोटो-इलेक्ट्रिक प्रभाव(Photoelectric effect) की खोज ने प्रकाश के कणो के बने होने के सिद्धांत मे एक नयी जान डाल दी।

इन दोनो मे क्या सही है? क्या प्रकाश कण है ? या एक तरंग ? read more »

अप्रैल 29, 2013

सापेक्षतावाद सिद्धांत : ब्रह्माण्ड के गुणधर्म


यदि आप ब्रह्माण्ड की व्याख्या कुछ मूलभूत शब्दो मे करना चाहें तो  आप कह सकते है कि ब्रह्माण्ड के कुछ सरल गुणधर्म होते हैं। हम इन सभी गुणों से परिचित भी हैं, इतने ज्यादा कि हम उन पर ध्यान भी नही देतें हैं। लेकिन विशेष सापेक्षतावाद के अंतर्गत ये गुणधर्म हमारी अपेक्षा के विपरीत आश्चर्यजनक रूप से व्यवहार करतें हैं। विशेष सापेक्षतावाद पर आगे बढने से पहले ब्रह्माण्ड के इन मूलभूत गुणो की चर्चा करतें है।

अंतराल/अंतरिक्ष(Space)

त्री-आयामी

त्री-आयामी

हम जो भी कुछ भौतिक वस्तुओ को देखते है या जो भी घटना घटीत होती है , वह अंतराल/अंतरिक्ष के तीन आयामो मे होती है। अंतराल/अंतरिक्ष यह हमारे भौतिक विश्व का त्रीआयामी चित्रण है। इसी अंतराल/अंतरिक्ष के कारण किसी भी पिंड/वस्तु की तीन दिशाओ मे लंबाई, चौडाई और ऊंचाई होती है और वह तीन दिशाओ दायें/बायें, उपर/नीचे तथा आगे/पिछे  गति कर सकता है।

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अप्रैल 22, 2013

22 अप्रैल : पृथ्वी दिवस पर हमारी वसुंधरा से जुड़े कुछ मनोरंजक तथ्य


पृथ्वी दिवस पर हमारी वसुंधरा से जुड़े कुछ मनोरंजक तथ्य!

  1.  पृथ्वी का एक दिन 23 घंटे 56 मिनट और 4.091 सेकेंड का होता है।
  2. पृथ्वी का घनफल एक ट्रिलीयन घन किमी है। क्या आप 1000 मीटर ऊँचे , 1000 मीटर लम्बे, 1000 मीटर चौड़े घन की कल्पना कर सकते है? अब ऐसे एक ट्रिलीयन घन की कल्पना किजीये, वह पृथ्वी है!
  3. पृथ्वी का द्रव्यमान 6,000,000,000,000,000,000,000,000 किलो है।
  4.  पृथ्वी पूरी तरह से गोल नहीं है। घू्र्णन से ध्रुवों पर चपटी है। ध्रुवों से व्यास 12,713.6 किमी (7882.4 मील) है लेकिन विषुवत पर 12,756.2 किमी (7908.8 मील ) है। दोनो में अंतर 43 किमी का है, जो 0.3 प्रतिशत है, यह ज़्यादा नहीं है लेकिन है। read more »
अप्रैल 15, 2013

सापेक्षतावाद सिद्धांत : परिचय


einsteenअलबर्ट आइन्स्टाइन ने 1905 में “विशेष सापेक्षतावाद(Theory of Special Relativity)” तथा 1915 में “सामान्य सापेक्षतावाद(Theory of General Relativity)” के सिद्धांत को प्रस्तुत कर भौतिकी की नींव हीला दी थी। सामान्य सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार न्युटन के गति के तीन नियम(Newtons laws of motion) पूरी तरह से सही नहीं है, जब किसी पिंड की गति प्रकाश गति के समीप पहुंचती है वे कार्य नहीं करते है। साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार न्युटन का गुरुत्व का सिद्धांत भी पूरी तरह से सही नहीं है और वह अत्याधिक गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्रो में कार्य नहीं करता है।

हम सापेक्षतावाद को विस्तार से आगे देखेंगे, अभी हम केवल न्युटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत तथा साधारण सापेक्षतावाद सिद्धांत के मध्य के अंतर को देखेंगे। ये दोनों सिद्धांत कमजोर गुरुत्वाकर्षण के लिए समान गणना करते है , यह एक सामान्य परिस्तिथी है जो हम रोजाना देखते और महसूस करते है। लेकिन निचे तीन उदाहरण दिए है जिसमे इन दोनों सिद्धांतो की गणनाओ में अंतर स्पष्ट हो जाता है। read more »

फ़रवरी 15, 2013

हिग्स बोसान संबधित 10 महत्वपूर्ण तथ्य


  1.  हिग्स बोसान ’ईश्वर कण’ नही है। जी हाँ लोग उसे ईश्वर कण कहते है क्योंकि लेओन लेडरमैन ने अपननी ’ईश्वर कण” नामक पुस्तक मे हिग्स बोसान को यह नाम दिया था। यह पुस्तक के विपणन के लिये एक अच्छा नाम था लेकिन वैज्ञानिक रूप से गलत था। इसी पुस्तक मे लेखक लेओन लेडरमैन तथा सह लेखक डीक टेरेसी ने लिखा है कि प्रकाशक इस पुस्तक का नाम ’गाडडैम पार्टीकल’ रखने के लिये तैयार नही था जबकि यह नाम हिग्स कण को खोजने मे आने वाली कठिनाईयों तथा अधिक लागत के संदर्भ मे उपयुक्त नाम था।
  2.  हिग्स बोसान के लिये नोबेल मिलेगा लेकिन किसे ? हम नही जानते है। हिग्स बोसान का आईडीया 1963 तथा 1964 के बहुत से शोधपत्रो के द्वारा प्रकाश मे आया था। एक शोधपत्र फ्रांसवा एन्ग्लेर्ट(Francois Englert) तथा राबर्ट ब्राउट (Robert Brout) का था, दो शोधपत्र पिटर हिग्स(Peter Higgs) के और एक शोधपत्र गेराल्ड गुरानिक(Gerald Guralnik) ,रिचर्ड हेगन(Richard Hagen) तथा टाम किबल(Tom Kibble) का था। परंपराओं के अनुसार एक वर्ष मे भौतिकी का नोबेल अधिकतम तीन लोगों को दिया जाता है। इसलिये चयन कठिन है। हिग्स बोसान की सैद्धांतिक खोज के साथ प्रायोगिक खोज भी महत्वपूर्ण है लेकिन इसमे समस्त विश्व मे फैले लगभग 7000 वैज्ञानिको का योगदान है जोकि नोबेल पुरस्कार के चयन को और कठिन बनाता है। यह संभव है कि लार्ज हेड्रान कोलाइडर( Large Hadron Collider) के निर्माताओं मे से किसी को नोबेल दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त यह भी संभव है कि तीन व्यक्तियों के नियमो से बाहर जाकर शांति के नोबेल की तरह इसे एक संस्था को दिया जाये। read more »