श्याम पदार्थ(Dark Matter)

November 3, 2006

भौतिकि मे श्याम पदार्थ उस पदार्थ को कहते है जो विद्युत चुंबकिय विकिरण(प्रकाश, क्ष किरण) का उत्सर्जन या परावर्तन पर्याप्त मात्रा मे नही करता जिससे उसे महसूस किया जा सके किंतु उसकी उपस्थिति साधारण पदार्थ पर उसके गुरुत्विय प्रभाव से महसूस की जा सकती है। श्याम पदार्थ की उपस्थिती के लिये किये गये निरिक्षणो मे प्रमुख है, आकाशगंगाओ की घुर्णन गति, किसी आकाशगंगाओ के समुह मे आकाशगंगा की कक्षा मे गति और आकाशगंगा या आकाश्गंगा के समुह मे गर्म गैसो मे तापमान का वितरण है। श्याम पदार्थ की ब्रम्हाण्ड के आकार ग्रहण प्रक्रिया() तथा महाविस्फोट केन्द्रीय संश्लेषण(Big Bang Ncleosynthesis)()प्रमुख भूमिका रही है। श्याम पदार्थ का प्रभाव ब्रम्हांडीय विकीरण के फैलाव और वितरण मे भी रहा है। यह सभी सबूत हमे यह बताते है कि आकाशगंगाये, आकाशगंगा समुह(Cluster) और ब्रम्हांड मे पदार्थ की मात्रा निरक्षित मात्रा से कही ज्यादा है, जो कि मुख्यतः श्याम पदार्थ है जिसे देखा नही जा सकता।

श्याम पदार्थ का संयोजन() अभी तक अज्ञात है लेकिन यह नये मुलभूत कणो जैसे विम्प (WIMP)() और एक्सीआन(Axions)(), साधारण और भारी न्युट्रीनो , ड्वार्फ तारो और ग्रहो(MACHO)() तथा गैसो के बादल से बना हो सकता है। हालिया सबूतो के अनुसार श्याम पदार्थ की संरचना नये मूलभूत कणो जिसे नानबायरोनिक श्याम पदार्थ(nonbaryonic dark matter) कहते है से होना चाहिये।

श्याम पदार्थ की मात्रा और द्रव्यमान साधारण दिखायी देने ब्रम्हाण्ड से कही ज्यादा है। अभी तक की खोजो मे ब्रम्हाण्ड मे बायरान और विकीरण का घन्त्व लगभग १ हायड्रोजन परमाणु प्रति घन मिटर है। इसका लगभग ४% उर्जा घन्तव देखा जा सकता है। लगभग २२% भाग श्याम पदार्थ का है ,बचा ७४% भाग श्याम उर्जा का है। कुछ मुश्कील से जांचे जा सकने वाले बायरानीक पदार्थ भी श्याम पदार्थ बनाते है लेकिन इसकी मात्रा काफी कम है। इस लापता द्रव्यमान की खोज भौतिकी और ब्रम्हाण्ड विज्ञान के सबसे बडे अनसुलझे रहस्यो मे से एक है।

सबसे पहले श्याम पदार्थ के बारे मे सबूत देने वाले कैलीफोर्निया ईन्स्टीट्युट आफ टेक्नालाजी के एक स्वीस विज्ञानी फ्रीटज झ्वीस्की थे। उन्होने कोमा आकाशगंगा समुह पर वाइरियल प्रमेय() का उपयोग किया और उन्हे लापता द्र्व्यमान का ज्ञान हुआ। झ्वीस्की ने कोमा आकाशगंगा समुह के किनारे की आकाशगंगाओ की गति के आधार पर कोमा आकाशगंगा समुह के द्रव्यमान की गणना की। जब उन्होने इस द्रव्यमान की तुलना आकाशगंगाओ और उनकी आकाश गंगा समुह (Cluster) की कुल प्रकाश दिप्ती के आधार पर ज्ञात द्रव्यमान से की तो उन्हे पता चला कि वहां पर अपेक्षा से ४०० गुना ज्यादा द्रव्यमान है। इस आकाशगंगा समुह मे दिखायी देने वाली आकाशगंगाओ का गुरुत्व इतनी तेज कक्षा के कारण काफी कम होना चाहिये, इन आकाशगंगाओ के पास अपने संतुलन के लिये कुछ और द्रव्यमान होना चाहिये। इसे लापता द्रव्यमान रहस्य(Missisng Mass Problem) कहा जाता है। झ्वीस्की ने इन अनुमानो के आधार पर कहा कि वहां पर कुछ अदृश्य पदार्थ होना चाहीये जो इस आकाशगंगा समुह को उचित द्रव्यमान और गुरुत्व प्रदान कर रहा है जिससे यह आकाशगंगा समुह का विखण्डन नही हो रहा है।

श्याम पदार्थ के बारे मे और सबुत आकाशगंगाओ की गति के अध्यन से प्राप्त हुये। इनमे से काफी आकाशगंगा एकसार है, इन पर वाइरियल प्रमेय लगाने पर इनकी कुल गतिज उर्जा(Kinetic Energy) इनके कुल गुरुत्व उर्जा का आधा होना चाहीये। प्रायोगिक नतिजो के अनुसार गतिज उर्जा इससे कहीं ज्यादा पायी गयी। आकाशगंगा के दृश्य द्रव्यमान के गुरुत्व को ही लेने पर , आकाशगंगा के केन्द्र से दूर तारो की गति वाइरियल्ल प्रमेय द्बारा गणित गति से कहीं ज्यादा पायी गयी। गैलेटीक घुर्णन वक्र कक्षा () जो घुर्णन गति और आकाशगंगा केन्द्र की व्याख्या करती है, इसे दृश्य द्रव्यमान से समझाया नही जा सकता। दृश्य पदार्थ आकाशगंगा समुह का एक एक छोटा सा ही हिस्सा है मान लेने पर इसकी व्याख्या की जा सकती है। आकाशगंगाये एक लगभग गोलाकार श्याम पदार्थ से बनी प्रतित होती है जिनके मध्य मे एक तश्तरी नुमा दृश्य पदार्थ है। कम चमकदार सतह वाली ड्वार्पह आकाशगंगाये श्याम पदार्थ के अध्यन के लिये जरूरी सुचनाओ का महत्वपूर्ण श्रोत है क्योंकि इनमे असाधारण रूप से साधारण पदार्थ और श्याम पदार्थ का अनुपात कम है और इनके केन्द्र मे कुछ ऐसे चमकिले तारे है जो बाहरी छोर पर स्थित तारो की कक्षा को विकृत कर देते है।

अगस्त २००६ मे प्रकाशित परिणामो के आधार पर श्याम पदार्थ , साधारण पदार्थ से अलग पाया गया है। यह परिणाम बुलेट आकाशगंगा समुह (Bullet Cluster) जो दो अलग अलग आकाशगंगा समुह की १५०० लाख वर्ष पहले हुयी भिडंत से बना है के अध्यन से मिले है।

आकाशगंगा की घुर्णन वक्र कक्षा

झ्वीस्की के निरिक्षण के ४० वर्षो बाद तक ऐसा कोई निरिक्षण नही मिला जिसमे प्रकाश और द्रव्यमान का अनुपात ईकाई से अलग हो। अधिक प्रकाश और द्रव्यमान का अनुपात श्याम पदार्थ की उपस्थिती दर्शाता है। १९७० के दशक की शुरूवात मे कार्नेगी इन्सीट्युट आफ वाशिण्गटन के एक विज्ञानी वेरा रूबीन ने एक नये ज्यादा संवेदनशील स्पेक्ट्रोग्राफ (जो कुंड्ली नुमा आकाशगंगा के सीरे की गति कक्षा को ज्यादा सही तरीके से माप सकता था) की मदद से कुछ नये परिणाम प्राप्त किये। इस विस्यमयकारी परिणाम के अनुसार किसी कुंडली नुमा आकाशगंगा के अधिकतर तारे एक जैसी गति से आकाशगंगा के केन्द्र की परिक्रमा करते है। इसका अर्थ यह था कि द्रव्यमान घनत्व अधिकतर तारो(आकाशगंगा केन्द्र) से दूर भी एकसार था। इसका एक अर्थ यह भी था कि या तो न्युटन का गुरुत्व नियम हर अवस्था मे लागु नही किया जा सकता या इन आकाशगंगा का ५०% से अधिक द्रव्यमान श्याम पदार्थ से बना है। इस परिणाम की पहले खिल्ली उडायी गयी लेकिन बाद मे ये मान लिया गया कि आकाशगंगा का अधिकतर भाग श्याम पदार्थ से बना है।

बाद मे इसी तरह के परिणाम इलीप्स के आकार की आकाशगंगाओ मे भी पाये गये। रूबीन के द्वारा ५०% प्रतिशत द्रव्यमान की गणना अब बडकर ९५% हो गयी है।

कुछ ऐसे भी आकाशगंगा समुह है जो श्याम उर्जा की उपस्थिती नकारते है। ग्लोबुलर आकाशगंगा समुह एक ऐसा ही आकाशगंगा समुह है। हाल ही मे कार्डीफ विद्यापिठ के विज्ञानीयो ने एक श्याम उर्जा की बनी हुयी आकाशगंगा की खोज की है। यह कन्या आकाशगंगा समुह (Virgo Cluster) से ५० प्रकाशवर्ष दूर है, इस आकाशगंगा का नाम VIRGOHI21 है। इस आकाशगंगा मे तारे नही है। इसकी खोज हायड्रोजन की रेडीयो तरण्गो के निरिक्षण से हुयी है। इसके घुर्णन कक्षा के अध्यन से वैज्ञानिको का अनुमान है कि इसमे हायडोजन के द्रव्यमान से १००० गुना ज्यादा श्याम पदार्थ है। इसका कुल द्रव्यमान हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी के द्रव्यमान का दंसवा भाग है। हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी मे भी दृस्य पदार्थ के द्रव्यमान से १० गुना ज्यादा श्याम पदार्थ मौजुद है।

श्याम पदार्थ आकाशगंगा समुह पर भी प्रभाव डालता है। एबेल २०२९ आकाशगंगा समुह जो की हजारो आकाशगंगाओ से बना है, इसके आसपास चारो ओर गरम गैसो और श्याम पदार्थ का आवरण फैला हुआ है। इस श्याम पदार्थ का द्रव्यमान १०१४ सुर्यो के द्रव्यमान के बराबर है। इस आकाशगंगा समुह के केन्द्र मे एक इलीप्स के आकार की आकाशगंगा (जो कुछ आकाशगंगाओ के मिलन से बनी है) है। इस आकाशगगां समुह की कक्षा की गति श्याम उर्जा निरिक्षणो के अनुरूप है।

श्याम उर्जा के निरिक्षण के लिये दूसरा साधन गुरुत्विय वक्रता (gravitational lensing)() है। यह प्रक्रिया सापेक्षतावाद के सिद्धांत के द्रव्यमान गणना पर आधारित है जो गतिज उर्जा पर निर्भर नही करती है। यह पूरी तरह श्याम उर्जा के द्रव्यमान की गणना के लिये स्वतण्त्र सिद्धांत है। एबेल १६८९ के आसपास प्रबल गुरुत्विय वक्रता पायी गयी है। इस वक्रता को माप कर उस आकासगंगा समुह का द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है। द्रव्यमान और प्रकाश के अनुपात से स्याम पदार्थ की उपस्थिती जांची जा सकती है।

श्याम पदार्थ की संरचना

अगस्त २००६ मे श्याम पदार्थ को प्रकाशीय पद्धती से जांच लिया गया है लेकिन अभी भी यह अटकलो के घेरे मे है। आकाशगंगा घुर्णन वक्र कक्षा, गुरुत्विय वक्रता, ब्रम्हांडीय पदार्थ का विभीन्न आकार बनाना(Structure Formation), आकाश गंगा समुह मे बायरान की अल्प उपस्थिती जैसे सबुत यह बताते है कि ८५-९०% पदार्थ विद्युत चुंबकिय बल से प्रतिक्रिया नही करता है। यह श्याम पदार्थ अपने गुरुत्विय बल से अपनी मौजुदगी दर्शाता है। इस श्याम पदार्थ की निम्नलिखित श्रेणीया हो सकती है।

बायरानीक श्याम पदार्थ

अबायरानीक श्याम पदार्थ (यह तिन तरह का हो सकता है)

.अत्याधिक गर्म श्याम पदार्थ

.गर्म श्याम पदार्थ

.शितल श्याम पदार्थ

अत्याधिक गर्म श्याम पदार्थ मे कण सापेक्ष गति(relativistic velocities)(१०) से गतिमान रहते है। न्युट्रीनो इस तरह का कण है। इस कण का द्रव्यमान कम होता है और इस पर विद्युत चुम्बकिय बल और प्रबल आणवीक बल का प्रभाव नही पड्ता है। इनकी जांच एक दूष्कर कार्य है। यह भी श्याम उर्जा के जैसा है। लेकिन प्रयोग यह बताते है कि न्युट्रीनो श्याम पदार्थ का एक बहुत ही छोटा हिस्सा है। गर्म श्याम पदार्थ महाविस्फोट के सिद्धांत पर खरे नही उतरते है लेकिन इनका आस्तित्व है।

शितल श्याम पदार्थ जिसके कण सापेक्ष गति नही करते है। बडे द्रव्यमान वाले पिंड जैसे आकाशगंगा के आकार के श्याम विवरो को गुरूतविय वक्रता के आधार पर अलग कर सकते है। संभव उम्मीदवारो मे सामान्य बायरोनिक पदार्थ वाले पिड जैसे भूरे ड्वार्फ या माचो (MACHO भारी तत्वो के अत्यंत घन्तव वाले पिंड) भी है। लेकिन महाविस्फोट के आणविक संयुग्मन (big bang nucleosynthesis ) प्रक्रिया ने विज्ञानीयो को यह विश्वास दिला दिया है कि MACHO जैसे बायरानिक पदार्थ कुल श्याम पदार्थ के द्रव्यमान का एक बहुत ही छोटा हिस्सा हो सकते है।

आज की स्थिती मे श्याम पदार्थ की संरचना अबायरानिक कणो, इलेक्ट्रान, प्रोटान, न्युट्रान, न्युट्रीनो जैसे कणो के अलावा, एक्सीआन, WIMP(Weakly Interacting Massive Particles कमजोर प्रतिक्रिया वाले भारी कण जिसमे न्युट्रलिनो भी शामील है), अचर न्युट्रीनो (sterile neutrinos)(१०) से बनी हुयी मानी जाती है। इनमे से कोई भी कण साधारण भौतिकी की आधारभूत संरचना का कण नही है।

श्याम पदार्थ की संरचना के उम्मीदवार कणो की खोज के लिये प्रयोग जारी है।

अगले अंक मे श्याम विवर

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()आकार ग्रहण प्रक्रिया(Structure Formation)- यह ब्रम्हांड निर्माण भौतिकि का एक मुलभूत अनसुलझा रहस्य है। ब्रम्हाण्ड जैसा की हम ब्रम्हांडीय विकीरण(Cosmic Microvave Background Radiation) के अध्यन से जानते है, एक अत्यंत घने , अत्यंत गर्म बिन्दू के महाविस्फोट से बना है। लेकिन आज की स्थिती मे हर आकार के आकाशिय पिंड मौजूद है, ग्रह से लेकर आकाशगंगाओ से आकार से गैसो के बादल (Cluster) के दानवाकार तक के है। एक शुरूवाती दौर के समांगी ब्रम्हांड से आज का ब्रम्हांड कैसे बना ?

() महाविस्फोट केन्द्रीय संश्लेषण(Big Bang Ncleosynthesis) : हायड्रोजन(H1) को छोडकर अन्य तत्वो के परमाणू केन्द्रक निर्माण की प्रक्रिया।

() साधारण पदार्थ(Byaronic Matter) मुख्यतः इलेक्ट्रान, न्युट्रान और प्रोटान से बना होता है। इलेक्ट्रान, न्युट्रान और प्रोटान को बायरान भी कहते है।

() विम्प(WIMP:weakly interacting massive particles): अभी तक ये कालप्नीक कण है। ये कण कमजोर आणविक बल और गुरूत्वाकर्षण बल से ही प्रतिक्रिया करते है। इनका द्रव्यमान साधारण कणो(बायरान) की तुलना मे काफी अधिक होता है। ये साधारण पदार्थ से प्रतिक्रिया नही करते जिससे इन्हे देखा और महसूस नही किया जा सकता।

()एक्सीआन(Axions): यह भी एक कालप्नीक मूलभूत कण है, इन पर कोई विद्युतिय आवेश नही होता है और इनका द्रव्यमान काफी कम १०-६ से १०- eV/c2 के बीच होना चाहिये। मजबूत चुम्बकिय बलो की उपस्थिती मे इन्हे फोटान मे बदल जाना चाहिये।

() माचो(अत्यंत विशाल सघन प्रकाशित पिंड)(MACHO: Massive compact halo object): ये उन पिण्डो के लिये दिया गया नाम है जो श्याम पदार्थ की उपस्थिती को समझने मे मदद कर सकते है। ये श्याम वीवर (Black Hole) , न्युट्रान तारे, सफेद ड्वार्फ या लाल ड्वार्फ भी हो सकते है।

()वाइरियल प्रमेय अदिक जानकारे के लिये देखें : http://en.wikipedia.org/wiki/Virial_theorem

() देखें http://en.wikipedia.org/wiki/Galactic_rotation_curve

()गुरुत्विय वक्र (gravitational lensing) :प्रकाश किरणो के मे उस समय आई वक्रता होती है जब ये किसी गुरुत्विय लेंस से गुजरती है। ये गुरुत्विय लेंस श्याम विवर भी हो सकता है।

(१०)अचर न्युट्रीनो (sterile neutrinos): जिन न्युट्रीनो पर कीसी भी मूलभूत बलो का प्रभाव नही होता है।


श्याम उर्जा (Dark Energy)

November 2, 2006

यह विषय एक विज्ञान फैटंसी फिल्म की कहानी के जैसा है। श्याम उर्जा(Dark Energy), एक रहस्यमय बल जिसे कोई समझ नही पाया है, लेकिन इस बल के प्रभाव से ब्रम्हाण्ड के पिंड एक दूसरे से दूर और दूर होते जा रहे है।

यह वह काल्पनिक बल है जिसका दबाव ऋणात्मक है और सारे ब्रम्हाण्ड मे फैला हुआ है। सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार , इस ऋणात्मक दबाव का प्रभाव गुरुत्वाकर्षण के विपरीत प्रभाव के समान है।

श्याम उर्जा १९९८ मे उस वक्त प्रकाश मे आयी , जब अंतरिक्ष विज्ञानीयो के २ समुहो ने विभीन्न आकाशगंगाओ मे विस्फोट की प्रक्रिया से गुजर रहे सितारो(सुपरनोवा)() पर एक सर्वे किया। उन्होने पाया की ये सुपरनोवा की प्रकाश दिप्ती अपेक्षित प्रकाश दिप्ती से कम है, इसका मतलब यह कि उन्हे जितने पास होना चाहिये थी , वे उससे ज्यादा दूर है। इसका एक ही मतलब हो सकता था कि ब्रम्हांड के विस्तार की गति कुछ काल पहले की तुलना मे बढ गयी है!(लाल विचलन भी देंखे)

इसके पहले तक यह माना जाता था कि ब्रम्हांड के विस्तार की गति धीरे धीरे गुरूत्वाकर्षण बल के कारण कम होते जा रही है। लेकिन सुपरनोवा के विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि कोई रहस्यमय बल गुरूत्वाकर्षण बल ले विपरीत कार्य कर ब्रम्हाण्ड के विस्तार को गति दे रहा है। यह एक आश्चर्यजनक , विस्यमयकारी खोज थी।

पहले तो वैज्ञानिको को इस प्रयोग के परिणामो की विश्वनियता पर ही शक हुआ। उन्हे लगा की सुपरनोवा की प्रकाशदिप्ती किसी गैस या धूल के बादल के कारण कम हो सकती है या यह भी हो सकता है कि सुपरनोवा की प्रकाश दिप्ती के बारे मे वैज्ञानिको का अनुमान ही गलत हो। लेकिन उपलब्ध आंकडो को सावधानी पुर्वक जांचने के बाद पता चला कि कोई रहस्यमय बल का आस्तित्व जरूर है जिसे आज हम श्याम उर्जा (Dark Energy) कहते है।

वैसे यह विचार एकदम नया नही है। आईंस्टाईन ने अपने सापेक्षतावाद के सिद्धांत(Theory of Relativity) मे एक प्रति गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को दर्शाने वाला बल ब्रम्हांडिय स्थिरांक (Cosmological Constant) का समावेश किया है। लेकिन आईन्स्टाईन खुद और बाद मे अन्य विज्ञानी भी मानते थे कि यह ब्रम्हांडिय स्थिरांक (Cosmological Constant) एक गणितिय सरलता के लिये ही है जिसका वास्तविकता से काफी कम रिश्ता है। १९९० तक किसी ने भी नही सोचा था कि यह ब्रम्हांडिय स्थिरांक एक सच्चाई भी हो सकता है।

दक्षिण केलीफोर्निया विश्वविद्यालय की वर्जीनिया ट्रीम्बल कहती हैश्याम उर्जा को प्रति गुरुत्वाकर्षण कहना सही नही है। यह बल गुरुत्वाकर्षण के विपरीत कार्य नही करता है। यह ठिक वैसे ही व्यव्हार करता है जैसे सापेक्षकतावाद के सिद्धांत के उसे अनुसार उसे करना चाहिये। सापेक्षतवाद के सिद्धांत के अनुसार इस बल का दबाव ऋणात्मक है।

उनके अनुसारमान लिजिये ब्रम्हाण्ड एक बडा सा गुब्बारा है। जब यह गुब्बारा फैलता है, तब विस्तार से इस श्याम उर्जा का घनत्व कम होता है और गुब्बारा थोडा और फैलता है। ऐसा इसलिये कि श्याम उर्जा से ऋणात्मक दबाव() उत्पन्न होता है। जबकि गुब्बारे के अंदर यह गुब्बारे को खिंचने की कोशीश कर रहा है, घनत्व जितना कम होगा यह गुब्बारे को अंदर की ओर कम खिंच पायेगा जिससे विस्तार और ज्यादा होगा। यही प्रक्रिया ब्रम्हाण्ड के विस्तार मे हो रही है।”

सुपरनोवा का उदाहरण यह बताता है कि ब्रम्हांड के विस्तार का त्वरण(acceleration) ५ खरब वर्ष पहले शूरू हुआ था। उस समय आकाशगंगाये इतनी दूरी पर जा चुकी थी कि गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव से श्याम उर्जा का प्रभाव ज्यादा हो चुका था।(ध्यान रहे गुरुत्वाकर्षण बल विभिन्न पिण्डो अपनी तरफ खिंचता है, श्याम उर्जा वही उन्हे एक दूसरे से दूर ले जाती है।) उस समय के पश्चात श्याम उर्जा के प्रभाव से ब्रम्हांड के विस्तार की गति बढते जा रही है। अब ऐसा प्रतित हो रहा है कि यह गति अनिश्चित काल के लिये बढते जायेगी। इसका मतलब यह है कि आज की तुलना मे खरबो वर्षो बाद हर आकाशिय पिंड एक दूसरे तेज और तेज दूर होते जायेगा और हम अकेले रह जायेंगे।

श्याम उर्जा के इस नये सिद्धांत ने वैज्ञानिको को थोडा निराश किया है, उन्हे एक अप्रत्याशीत और एकदम नये ब्रम्हांड की अवधारणा को स्विकारना पडा है। वे पहले ही एक श्याम पदार्थ(Dark Matter) की अवधारणा को मान चुके है। आज की गणना के अनुसार यह श्याम पदार्थ , वास्तविक पदार्थ से कहीं ज्यादा है। यह एक ऐसा पदार्थ है जिसे आज तक किसी प्रयोगशाला मे महसूस नही किया गया है लेकिन इसके होने के सबुत पाये गये है। अब श्याम उर्जा का आगमन जख्मो पर नमक छिडकने के समान है।

अंतरिक्ष विज्ञानीयो के अनुसार ब्रम्हांड तिन चिजो से बना है साधारण पदार्थ , श्याम पदार्थ और श्याम उर्जा। हम सिर्फ साधारण पदार्थ के बारे मे जानते है। ब्रम्हाडं का ९०-९५% भाग ऐसे दो पदार्थो से बना है जिसके बारे मे कोई नही जानता , यह सुनकर आप कैसा महसूस करते है ?

क्वांटम भौतिकी को समझने के लिये दो पिढीया लग गयी। यह समय उस विज्ञान के बारे मे था जिसे हम प्रयोगशाला मे प्रयोग कर के सिद्ध कर सकते थे। एक ऐसे पदार्थ और उर्जा को समझना जिसे देखा नही जा सकता, प्रयोगशाला मे बनाया नही जा सकता कितना कठीन है ?

लेकिन श्याम उर्जा ने एक ऐसे रहस्य को सुलझा दिया है जो ब्रम्हांडिय विकीरण ने उत्पन्न किया था। ब्रम्हाण्डीय विकीरण की तिव्रता के विचलन पर हाल ही के प्रयोगो से प्राप्त आंकडे ब्रम्हांड के अनंत विस्तार के सिद्धांत का प्रतिपादन करते हैं। लेकिन वैज्ञानिको के लिये इस विस्तार के पिछे कारणीभूत बल एक पहेली था, श्याम उर्जा शायद इसी का हल है।

श्याम उर्जा का आस्तित्व चाहे किसी भी रूप मे गणना की गयी ब्रम्हांड की ज्यामिती और ब्रम्हांड के कुल पदार्थ की मात्रा के संतुलन के लिये जरूरी है। ब्रम्हांडीय विकीरण (cosmic microwave background (CMB)), की गणना यह संकेत देती है की ब्रम्हांड लगभग सपाट(Flat) है। ब्रम्हाण्ड के इस आकार के लिये , द्रव्यमान और उर्जा का अनुपात एक निश्चित क्रान्तिक घनत्व(Critical Density) के बराबर होना चाहिये। ब्रम्हाण्ड के कुल पदार्थ की मात्रा (बायरान और श्याम पदार्थ को मिला कर), ब्रम्हांडीय विकीरण की गणना के अनुसार क्रान्तिक घनत्व का सिर्फ ३०% ही है। इसका मतलब यह है कि श्याम उर्जा ब्रम्हांड के कुल द्रव्यमान का ७०% होना चाहीये।

हाल के अध्यन से ज्ञात हुआ है कि ब्रम्हांड का निर्माण ७४% प्रतिशत श्याम उर्जा से, २२% श्याम पदार्थ से और सिर्फ ४% साधारण पदार्थ से हुआ है। और हम इसी ४% साधारण पदार्थ के बारे मे जानते है।

श्याम उर्जा की प्रकृती एक सोच का विषय है। यह समांगी, कम घन्तव का बल है जो गुरुत्वाकर्षण के अलावा किसी और मूलभूत बलो() से कोई प्रतिक्रिया नही करता है। इसका घन्तव काफी कम है लगभग १०-२९ g/cm3 इसकी प्रयोगशाला मे जांच लगभग असंभव ही है।

श्याम उर्जा को समझाने के लिये सबसे ज्यादा मान्य सिद्धांत है ब्रम्हाण्डिय स्थिरांक सिद्धांत:

यह आईन्स्टाईन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत है। यह एक दम सरल है, इसके अनुसार अंतराल मे (Volume of Space) मे एक अंतस्थ मूलभूत उर्जा होती है। यह एक ब्रम्हाण्डिय स्थिरांक है जिसे लैम्डा कहते है। द्रव्यमान और उर्जा का ये आईन्सटाईन के समीकरण e=mc2 के द्वारा संबधीत है, इससे यह साबीत होता है कि ब्रम्हाण्डिय स्थिरांक पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव होना चाहिये। इसे कभी कभी निर्वात उर्जा (Vacuum Energy) भी कहते है क्योंकि यह निर्वात की उर्जा का घनत्व है। वैज्ञानिको की गणना के अनुसार ब्रम्हाण्डिय स्थिरांक का मूल्य १०-२९ g/cm3 है।

ब्रम्हाण्डिय स्थिरांक एक ऋणात्मक दबाव वाला बल है जो अपने उर्जा घन्तव के बराबर होता है, इसी वजह से यह ब्रम्हांड के विस्तार को त्वरण देता है।

श्याम उर्जा का ब्रम्हांड के भविष्य पर प्रभाव

जैसा कि हम पहले देख चुके है सुपरनोवा का उदाहरण यह बताता है कि ब्रम्हांड के विस्तार का त्वरण(acceleration) ५ खरब वर्ष पहले शूरू हुआ था। इसके पहले यह सोचा जाता था कि ब्रम्हांड के विस्तार की गति बायरानीक और श्याम पदार्थ के गुरुत्वाकर्षण के फलस्वरूप कम हो रही है। विस्तारीत होते ब्रम्हांड मे श्याम पदार्थ का घन्तव का श्याम उर्जा की तुलना मे ज्यादा तिव्रता से ह्रास होता है। जिससे श्याम उर्जा का पलडा भारी रहता है। जब ब्रम्हाण्ड का आकार दूगुणा हो जाता है श्याम पदार्थ का घन्तव आधा हो जाता है जबकी श्याम उर्जा का घनत्व ज्यों का त्यों रहता है। सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार तो यह ब्रम्हांडिय स्थिरांक (Cosmological Constant) है।

यदि विस्तार की गति इस तरह से बढती रही तो आकाशगंगाये ब्रम्हांडीय क्षितीज के पार चली जायेंगी और दिखायी देना बंद हो जायेंगी। ऐसा इसलिये होगा कि उनकी गति प्रकाश की गति से ज्यादा हो जायेगी। यह सापेक्षतावाद के नियम का उलंघन नही है। पृथ्वी, अपनी आकाशगंगा मंदाकिनी को कोई असर नही पडेगा लेकिन बाकि का सारा ब्रम्हांड दूर चला जायेगा।

ब्रम्हांड के अंत के बारे कुछ कल्पनाये है जिसमे से एक है कि श्याम उर्जा का प्रभाव बढते जायेगा, और एक समय यह केन्द्रीय बलो और अन्य मूलभूत बलो से भी ज्यादा हो जायेगा। इस स्थिती मे श्याम उर्जा सौर मंडल, आकाशगंगा, कोई भी पिंड से लेकर अणु परमाणु सभी को विखंडीत कर देगी। यह स्थिती महाविच्छेद (Big Rip) की होगी।

दूसरी कल्पना महासंकुचन(Big Crunch)की है, इसमे श्याम उर्जा का प्रभाव एक सीमा के बाद खत्म हो जायेगा और गुरुत्वाकर्षण उस पर हावी हो जायेगा। यह एक संकुचन की प्रक्रिया को जन्म देगा। अंत मे एक महासंकुचन से सारा ब्रम्हाण्ड एक बिंदू मे तब्दिल हो जायेगा| यह बिंदू एक महाविस्फोट से एक नये ब्रम्हांड को जन्म देगा।

अगले अंक मे श्याम पदार्थ

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()सुपरनोवा- कुछ तारो के जिवन काल के अंत मे जब उनके पास का सारा इण्धन (हायड्रोजन) जला चुका होता है,उनमे एक विस्फोट होता है। यह विस्फोट उन्हे एक बेहद चमकदार तारे मे बदल देता है जिसे सुपरनोवा या नोवा कहते है।

()ऋणात्मक दबाव - यह वह दबाव को कहते जो आसपास के द्रव (जैसे वायु) के दबाव कम होता है।

() मूलभूत बल : गुरुत्वाकर्षण, विद्युत चुंबकिय बल, कमजोर केन्द्रीय बल, मजबूत केन्द्रीय बल