क्या समय यात्रा संभव है?


एच जी वेल्स के उपन्यास “द टाईम मशीन” मे नायक एक विशेष कुर्सी पर बैठता है जिस पर कुछ जलते बुझते बल्ब लगे होते है, कुछ डायल होते है , नायक डायल सेट करता है, कुछ बटन दबाता है और अपने आपको भविष्य के हज़ारों वर्षों बाद में पाता है।

समय यान (Time Machine)- २००२ मे बनी हालीवुड की फिल्म मे दिखाया समय यान

उस समय तक इंग्लैड नष्ट हो चुका होता है और वहां पर मार्लाक और एलोई नामक नये प्राणीयों का निवास होता है। यह विज्ञान फतांसी की एक महान कथा है लेकिन वैज्ञानिकों ने समय यात्रा की कल्पना या अवधारणा पर कभी विश्वास नही किया है। उनके अनुसार यह सनकी,रहस्यवादी और धुर्तो के कार्यक्षेत्र की अवधारणा है , उनके पास ऐसा मानने के लिये ठोस कारण भी है। लेकिन क्वांटम गुरुत्व (Quantum Gravity) मे आश्चर्यजनक रूप से प्रगति इस अवधारणा की चूलो को हिला रही है।

समय यात्रा की अवधारणा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इससे जुड़े पहेलीयों जैसे ढेर सारे विरोधाभास (Paradox) है।

विरोधाभास १:

इस उदाहरण के  अनुसार कोई व्यक्ति बिना माता पिता के भी हो सकता है। क्या होगा जब कोई व्यक्ति भूतकाल में जाकर अपने पैदा होने से पहले अपने माता पिता की हत्या कर दे ? प्रश्न यह है कि यदि उसके माता-पिता उसके जन्म से पहले ही मर गये तो उनकी हत्या करने के लिये वह व्यक्ति पैदा कैसे हुआ ?

विरोधाभास २:

यह ऐसा विरोधाभास है जिसमे एक व्यक्ति का कोई भूतकाल नहीं है। उदाहरण के लिये मान लेते है कि एक युवा आविष्कारक अपने गैराज में बैठ कर समययान मशीन बनाने की कोशिश कर रहा है। अचानक एक वृद्ध व्यक्ति उसके सामने प्रकट होता है और उसे समययान बनाने की विधि देकर अदृश्य हो जाता है। युवा आविष्कारक समय यात्रा से प्राप्त जानकारीयो से शेयर मार्केट, घुड़दौड़, खेलों के सट्टे से काफी सारा पैसा कमाकर अरबपति बन जाता है। जब वह बूढ़ा हो जाता है तब वह समय यात्रा कर भूतकाल में जाकर अपनी ही युवावस्था को समययान बनाने की विधि देकर आता है। प्रश्न यह है कि समययान बनाने की विधि कहां से आयी ?

विरोधाभास ३:

इस विरोधाभास मे एक व्यक्ति अपनी ही माता है। ’जेन’ को एक अनाथालय में एक अजनबी छोड़ गया था। जब जेन युवा होती है उसकी मुलाकात एक अजनबी से होती है, उस अजनबी के संसर्ग से जेन गर्भवती हो जाती है। उस समय एक दुर्घटना घटती है। जेन एक बच्ची को जन्म देते समय मरते मरते बचती है लेकिन बच्ची का रहस्यमय तरीके से अपहरण हो जाता है। जेन की जान बचाते समय डाक्टरो को पता चलता है कि जेन के पुरुष और महिला दोनों जननांग है। डाक्टर जेन को बचाने के लिये उसे पुरुष बना देते है। अब जेन बन जाती है “जिम”।इसके बाद जिम शराबी बन जाता है। एक दिन उसे भटकते हुये एक शराबख़ाने में एक बारटेंडर मिलता है जो कि एक समययात्री होता है। जिम उस समययात्री के साथ भूतकाल मे जाता है वहां उसकी मुलाकात एक लड़की से होती है। वह लड़की जिम के संसर्ग में गर्भवती हो जाती है और एक बच्ची को जन्म देती है। अपराध बोध में जिम उस नवजात बच्ची का अपहरण कर उसे एक अनाथालय मे छोड़ देता है। बाद में जिम समययात्रीयो के दल में शामिल हो जाता है और भटकती जिन्दगी जीता है। कुछ वर्षों बाद उसे एक दिन उसे सपना आता है कि उसे बारटेंडर बनकर भूतकाल में एक जिम नामके शराबी से मिलना है। प्रश्न : जेन की मां, पिता, भाई, बहन, दादा, दादी, बेटा,बेटी, नाती, पोते कौन है?

इन्ही सभी विरोधाभासो के चलते समययात्रा को असंभव माना जाता रहा है। न्युटन ने समय को एक बाण के जैसा माना था, जिसे एक बार छोड़ दिया तब वह एक सीधी रेखा मे चलता जाता है। पृथ्वी पर एक सेकंड, मंगल पर एक सेकंड के बराबर था। ब्रह्मांड मे फैली हुयी घड़ीयां एक गति से चलती थी। आइंसटाईन ने एक नयी क्रांतिकारी अवधारणा को जन्म दिया। उनके अनुसार समय एक नदी के प्रवाह के जैसे है जो सितारो, आकाशगंगाओ के घुमावो से बहता है, इसकी गति इन पिंडो के पास से बहते हुये कम ज्यादा होती रहती है। पृथ्वी पर एक सेकंड मंगल पर एक सेकंड के बराबर नही है। ब्रह्मांड मे फैली हुयी घड़ीयां अपनी अपनी गति से चलती है। आइंस्टाईन की मृत्यु से पहले उन्हे एक समस्या का सामना करना पडा था। आइंस्टाइन के प्रिन्स्टन के पड़ोसी कर्ट गोएडल (जो शायद पिछले ५०० वर्षो के सर्वश्रेष्ठ गणितिय तर्क शास्त्री है) ने आईन्स्टाईन के समीकरणों का एक ऐसा हल निकाला जो समय यात्रा को संभव बनाता था। समय की इस नदी के प्रवाह मे अब कुछ भंवर आ गये थे जहां समय एक वृत्त मे चक्कर लगाता था ! गोयेडल का हल शानदार था, वह हल एक ऐसे ब्रह्मांड की कल्पना करता था जो एक घूर्णन करते हुये द्रव से भरा है। कोई भी इस द्रव के घूर्णन की दिशा मे चलता जायेगा अपने आपको प्रारंभिक बिन्दू पर पायेगा लेकिन भूतकाल मे !

अपने वृत्तांत मे आईन्स्टाईन ने लिखा है कि वे अपने समीकरणों के हल मे समययात्रा की संभावना से परेशान हो गये थे। लेकिन उन्होने बाद मे निष्कर्ष निकाला कि ब्रह्मांड घूर्णन नही करता है, वह अपना विस्तार करता है(महाविस्फोट – Big Bang Theory)। इस कारण गोएडल के हल को माना नही जा सकता। स्वाभाविक है कि यदि ब्रह्मांड घूर्णन करता होता तब समय यात्रा सारे ब्रह्मांड मे संभव होती।

१९६३ मे न्युजीलैंड के एक गणितज्ञ राय केर ने घूर्णन करते हुए ब्लैक होल के लिये आइंसटाईन के समीकरणों का हल निकाला। इस हल के कुछ विचित्र गुणधर्म थे। इसके अनुसार घूर्णन करता हुआ ब्लैक होल एक बिन्दु के रूप मे संकुचित ना होकर एक न्युट्रान के घुमते हुये वलय के रूप मे होगा। यह वलय इतनी तेजी से घुर्णन करेगा कि अपकेन्द्री बल(centrifugal force) इसे एक बिन्दु के रूप मे संकुचित नही होने देगा। यह वलय एक तरह से एलीस के दर्पण के जैसे होगा। इस वलय मे से जानेवाला यात्री मरेगा नही बल्कि एक दूसरे ब्रह्मांड मे चला जायेगा। इसके पश्चात आईन्सटाईन के समीकरणॊ के ऐसे सैंकड़ो हल खोजे जा चूके है जो समय यात्रा या अंतरिक्षीय सूराख़ों (Wormholes) की कल्पना करते है।

अंतरिक्षिय सूराख (Wormhole)

ये अंतरिक्षीय सूराख ना केवल अंतरिक्ष के दो स्थानो को जोड़ते है बल्कि दो समय क्षेत्रो को भी जोड़ते है। तकनीकी रूप से इन्हे समय यात्रा के लिये प्रयोग किया जा सकता है। हाल ही मे क्वांटम सिद्धांत मे गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को जोड़ने के जो प्रयास हुये है उपर दिये गये विरोधाभासो के बारे मे कुछ और जानकारी दी है। क्वांटम भौतिकी मे किसी भी वस्तु की एक से ज्यादा अवस्था हो सकती है। उदाहरण के लिये एक इलेक्ट्रान एक समय मे एक से ज्यादा कक्षा मे हो सकता है(इसी तथ्य पर ही सारे रासायनिक सिद्धांत आधारित है)। क्वांटम भौतिकी के अनुसार स्क्राडीन्गर की बिल्ली एक साथ दो अवस्था मे हो सकती है, जीवित और मृत। इस सिद्धांत के अनुसार भूतकाल मे जाकर उसमे परिवर्तन करने पर जो परिवर्तन होगे उससे एक समानांतर ब्रम्हाण्ड बनेगा। मौलिक ब्रम्हाण्ड वैसा ही रहेगा।

यदि हम भूतकाल मे जाकर महात्मा गांधी को बचाते है तब हम किसी और के भूतकाल को बचा रहे होंगे, हमारे गांधी फिर भी मृत ही रहेंगे। महात्मा गांधी को हत्यारे से बचाने पर  ब्रह्मांड दो हिस्सो मे बंट जायेगा, एक ब्रह्मांड जहां गाधींजी की हत्या नही हुयी होगी, दूसरा हमारा मौलिक ब्रह्मांड जहां गांधीजी की हत्या हुयी है। इसका मतलब यह नही कि हम एच जी वेल्स के समय यान मे प्रवेश कर समय यात्रा कर सकते है! अभी भी कई रोड़े है !

पहली, मुख्य समस्या है उर्जा ! एक कार के लिये जिस तरह पेट्रोल चाहीये उसी तरह समययान के लिये काफी सारी मात्रा मे ऊर्जा चाहिये! इतनी मात्रा मे ऊर्जा प्राप्त करने के लिये हमे किसी तारे की संपूर्ण ऊर्जा का उपयोग करने के तरीके सीखने होगें या असाधारण पदार्थ जैसे ऋणात्मक पदार्थ(Negative Matter) (ऐसा पदार्थ जो गुरुत्वाकर्षण से उपर जाये, निचे ना गिरे) खोजना होगा या ऋणात्मक ऊर्जा(Negative Energy) का श्रोत खोजना होगा। (ऐसा माना जाता था कि ऋणात्मक ऊर्जा असंभव है लेकिन अल्प मात्रा मे ऋणात्मक ऊर्जा का प्रयोगिक सत्यापन कैसीमीर प्रभाव(Casimir effect) से हो चूका है।) ऋणात्मक ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उत्पादन कम से कम अगली कुछ शताब्दीयो तक संभव नही है। ऋणात्मक पदार्थ अभी तक खोजा नही गया है। ध्यान दे ऋणात्मक पदार्थ प्रतिपदार्थ (Antimatter) या श्याम पदार्थ(Dark Matter) नही है।

इसके अलावा समस्या स्थायित्व की भी है। केर का ब्लैक होल अस्थायी हो सकता है, यह किसी के प्रवेश करने से पहले ही बंद हो सकता है। क्वांटम भौतिकी के अंतिरिक्षिय सूराख भी किसी के प्रवेश करने से पहले बंद हो सकते है। दुःर्भाग्य से हमारी गणित इतनी विकसित नही हुयी है कि वह इन अंतिरिक्षिय सूराखो(Wormholes) के स्थायित्व की गणना कर सके क्योंकि इसके लिये हमे “थ्योरी आफ एवरीथिंग(Theory of Everything)” चाहिये जो गुरुत्व और क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतो का एकीकरण कर सके। अभी तक थ्योरी आफ एवरीथिंग का एक ही पात्र सिद्धांत है सुपरस्ट्रींग थ्योरी(Super String Theory)। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो अच्छी तरह से परिभाषित अवश्य है लेकिन इसका हल अभी तक किसी के पास नही है।

स्याम विवर (Black Hole)

स्याम विवर (Black Hole)

मजेदार बात यह है कि स्टीफन हांकिन्ग ने समय यात्रा की अवधारणा का विरोध किया था। उन्होने यह भी कहा था कि उनके पास इसके अनुभवजन्य प्रमाण है। उनके अनुसार यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षो मे सैधांतिक भौतिकी मे काफी नयी खोज हुयी है ,जिससे प्रभावित होकर हाकिंग ने अपना मत बदल दिया है। अब उनके अनुसार समय यात्रा संभव है लेकिन प्रायोगिक(practical) नही !

हमारे पास भविष्य से यात्री इस कारण नही आते होंगे क्योंकि हम इतने महत्वपूर्ण नही है। समय यात्रा कर सकने में सफल सभ्यता काफी विकसीत होगी, वह किसी तारे की सम्पूर्ण ऊर्जा के दोहन में सक्षम होगी।  जो भी सभ्यता किसी तारे की ऊर्जा पर नियंत्रण कर सकती है उनके लिये हम एक आदिम सभ्यता से बढकर कुछ नही है। क्या आप चिंटीयो को अपना ज्ञान, औषधी या ऊर्जा देते है ? आपके कुछ दोस्तो को तो शायद उनपर पैर रख कर कुचलने की ईच्छा होती होगी।

कल कोई आपके दरवाजे पर दस्तक दे और कहे कि वह भविष्य से आया है और आपके पोते के पोते का पोता है तो दरवाजा बंद मत करिये। हो सकता है कि वह सही हो।

About these ads

44s टिप्पणियाँ to “क्या समय यात्रा संभव है?”

  1. मेरे विचार से समय यात्रा वाली विज्ञान कथायें महज मनोरंजन प्रदान कर सकती हैं, उस से ज्यादा कुछ नहीं।

  2. हमें कल्पनालोक की उड़ाने रोमांचित करती हैं…बस्स….
    इससे ज़्यादा कोई मूल्य नहीं…समय-यात्राओं का….
    बेहतर….

  3. about 50 years ago people cant believe tat they can make vedio call from india to america but now a days it is possible. similerly we can also travel in past and future by inventing the technology for this porpuse. because on the basis of Einsteens relativety theory in three dimention and with the help of higher mathmatics we can easily observe that shape, length and time of a moving body are changed with increase in speed.

  4. बहुत अच्छा लिखा है। बधाई!
    समय यात्रा कब सफ़ल होगी (होगी भी या नहीं)कहना मुश्किल है लेकिन उसकी कल्पना करना मजेदार है!

  5. आशा करता हू आज नहीं तो कल मेरे पोते का पोता मुझसे मिलने जरुर आयेगा |

  6. bahut badhiya jankari many thanks

  7. एक कठिन विचार के सरल एवं रोचक प्रस्तुतीकरण के लिए धन्यवाद .

  8. जैसे भावना में भगवान बसते हैं और समय समय पर अवतार लेते हैं वैसे ही यह संभव है वैसे इतना आसान भी नहीं क्योंकि यह गूढ़ रहस्य है और वेद करते हैं कि योगी अपने स्थूल शरीर से निकलकर सूक्ष्म शरीर के साथ कहीं भी यात्रा कर सकता है पर आज हम अपने मन की गति की दिशा भौतिक जगत में ही केन्द्रित कर रखते हैं और यह भविष्य में संभव हो सकता है कि हम समय यात्रा करें अंकुर पांडेय

  9. मै कहना चाहूंगा कि बहुत सारी चीजें जो आज बन रही है वो पहले ही पौराणिक कथाओं में वर्णित है. जैसे हम आज फोन करते हैं पौराणिक कथाओं में मुनि-महात्मा मन से किसी से भी बात कर सकते थे. आज हवाई जहाज बन गया पहले भी रामायण में पुश्पक विमान के बारे में जानकारी मिलती है इसी तरह पौराणिक कथाओं के ऋषि महात्मा त्रिकाल दर्शी होते थे वह भी अब सफल होने वाला है चाहे हम समय यात्रा कर पायें या नहीं पर भूत भविष्य देखने का कोई यंत्र जरूर बनेगा.

    • अमित जी,
      क्षमा किजीये मै पौराणिक कथाओ में विज्ञान खोजने का प्रयास नहीं करता! क्योंकि मुझे विज्ञान या ज्ञान के लुप्त होने का कोई कारण समझा में नहीं आता. जब कोई सिद्धांत ज्ञात था, वह लुफ्त कैसे हो गया ? पौराणिक कथाओं में यदि विज्ञान है तो क्यों नहीं कोई उन्हें पढ़कर कोई नया सिद्धांत प्रस्तावित करता है ? किसी भी नव ज्ञात तथ्य को किसी पौराणिक कथा में फिट करना आसान है, लेकिन किसी पौराणिक कथा को पढ़कर नया सिद्धांत या नयी खोज क्यों नहीं की जाती है ?
      क्षमा किजीये, मेरे विचार आपसे भिन्न है.

      • प्रिय आशीष जी , भारतीय पूरा ज्ञान एवं आध्यात्म आज के विज्ञान का मूल आधार है , यह भावनात्मक नहीं सिद्ध है . राजा मुचुकंद जब देवताओ की तरफ से असुरो से लड़ने स्वर्ग गए तो उस लड़ाई में विजय के बाद वे जब धरती पर वापस जाने लगे तो देवराज इन्द्र ने उन्हें बताया की यहाँ युद्ध के कुछ दिनों में वहा पृथ्वी पे कई युग बीत चुके है ,अपने परिजनों के वियोग से दुखी एवं शेष आयु पूरी करने के लिए मुच्कंद ने इन्द्र से दीर्घनिद्रा का वर माँगा ओर सो गए , फिर उन्ही की नीद को तोड़ने वाले काल यवन नामक दुष्ट आक्रमणकारी को भगवन कृष्ण ने मुचुकंद की प्रथम दृष्टी से मरवाया . मतलब ये की समय गति में फर्क की अवधारणा पूर्व में ही घ्यात थी .आशीष जी नासा के वैज्ञानिको की ९०% खोजे उन्ही पोरानिक एवं दुर्लभ हिन्दू ग्रन्थ एवं पांडुलिपियों से प्रेरित है .आर्यभट , चरक , वराहमिहिर ,सुश्रुत , मयासुर,जेमिनी ,……………… अनगिनत .ये आपसे कोई तर्क नहीं है जानकारी है .दुनिया का सबसे बड़ा एवं युनिवेर्सल सिधांत है ” सरल आवृत गति ” हर सिधांत , जीवन , खोजे ,सभ्यता , सृष्टी सभी एक निश्चित समय के अन्तराल पे पुनः बार बार प्रकट -विकसित-अदृश्य होते रहते है. हम सभी पुराणी ही खोजो को पुनः नवीनीकृत कर रहे है . ” ऐसा मेरा मत है . धन्यवाद .

  10. my friends, each person can experience upto his thought so i am agree with you all. human lives 60 to 100 year or some 120 year in his life. and our universe is of million year old. so in this very small time we can’t know the secrete of whole universe.

    i have some special knowledge about it i can’t say that all in this small comment , if you want to know you can mail me -shivshankarsonwani@gmail.com-

    believe me you will be socked but feel divine…………….

  11. “कल कोई आपके दरवाजे पर दस्तक दे और कहे कि वह भविष्य से आया है और आपके पोते के पोते का पोता है तो दरवाजा बंद मत करिये। हो सकता है कि वह सही हो।”

    जी, यहाँ पर शायद आपसे त्रुटी हो रही है! उसका कारण ये है कि भविष्य में जाना तो संभव है पर भूतकाल में नहीं!
    भूतकाल मे जाना क्यूँ संभव नहीं है, इसके लिए तो आपके विरोधाभास ही काफी हैं.
    1. जब कोई व्यक्ति भूतकाल में जाकर अपने पैदा होने से पहले अपने माता पिता की हत्या कर दे ? प्रश्न यह है कि यदि उसके मातापिता उसके जन्म से पहले मर गये तो उनकी हत्या करने के लिये वह व्यक्ति पैदा कैसे हुआ ?
    2. यदि समय यात्रा संभव है, तब भविष्य से आने वाले समय यात्री कहां है ? भविष्य से कोई यात्री नही है, इसका अर्थ है समय यात्रा संभव नही है।

    सैद्धांतिक दृष्टि से भी भूतकाल में जाना संभव नहीं है, पर भविष्य में जाना संभव है. अगर हम प्रकाश कि गति से भी अधिक तेज गति प्राप्त कर सकें तो संभव है कि हम भूतकाल कि भी यात्रा कर सकें. परन्तु प्रकाश कि गति से तेज यात्रा संभव नहीं है, इसलिए भूतकाल कि यात्रा भी संभव नहीं है. आइन्स्टीन का एक सूत्र है, t’ = t √1-v^2/c^2 . इस सूत्र में v का मान अगर प्रकाश कि गति से अधिक रखते हैं, तो t’ यानि हमारे यान के अंदर का समय √-x यानि एक काल्पनिक मान प्राप्त होता है. यानि ये सूत्र भी भूतकाल कि कालयात्रा को रोंकता है.
    परन्तु यदि हम इसमें प्रकाश कि गति से कुछ कम वेग रखते हैं, तो t’ का मान t से कम प्राप्त होता है. जो कि इस बात का संकेत देते हैं कि भविष्य में जाना संभव है.

    ये तो रही सैद्धांतिक बात. पर अगर सामान्य दृष्टि से देखें तो भविष्य कि यात्रा करने में कोई विरोधाभाष भी नहीं होता. अतः भविष्य में भविष्य कि काल यात्रा संभव हो सकेगी. मगर ये सिर्फ एक तरफ़ा यात्रा होगी. हम भविष्य में जाकर पुनः वापस नहीं आ सकेंगे.

    • अनमोल,

      भूतकाल की यात्रा मे कुछ विरोधाभास जरूर है लेकिन सैद्धांतिक भौतिकी के वर्तमान मे ज्ञात नियमो के अनुसार यह संभव है। ध्यान रहे की काल-अंतराल (space -time) सपाट नही है, इसमे वर्क्रता होती है, जिससे कुछ ऐसे शार्ट कट संभव है जैसे श्वेत विवर (Wormhole) जो दो भिन्न कालखंडो को जोड़ सकते है।

      एक बात और, संभव और प्रायोगिक मे एक बड़ी दूरी होती है। हर संभव घटना का प्रायोगिक सत्यापन असंभव है। जो नियमो के अनुसार संभव हो जरूरी नही कि उसे प्रायोगिक तौर पर किया जा सके।

  12. Ji,
    Aise siddhanto ka kya arth hai, jo sirf siddhant hi ho, wastvikta se unka koi sambandh na ho. Aur fir koi bhi siddhant, agar wo sahi hai to bhale hi use aaj siddh na kiya ja sake, per bhavishya mein to unka prayogik satyapan sambhav hi hai. Aur agar nahi sambhav hota hai to iska arth hai ki wo siddhant sahi nahi hai. Agar hum use sahi maan bhi lete hain, to fir vigyan aur darshan me kya antar rah jayega? Jabki vigyan se ye apeksha ki jati hai ki wo kisi bhi galat siddhant ko sweekar nahi karta!

    Aur agar siddhanto me bhootkaal ki yatra sambhav hai, to iska seedha sa arth hai ki wo siddhant galat hai. Kyunki jab bhootkaal ki yatra sambhav hi nahi hai to fir use siddhant kaise siddh kar sakte hain? Wo siddh kar rahe hain, iska arth hai ki unke siddhant galat hain…
    .
    Aur kya apko pata hai ki ve kaun se siddhant hain jo ise sambhav mante hain? Aur kaise?
    .
    Aapne jo tark diya hai ki mahatma gandhi ko agar koi bacha leta hai, to uske liye ek alag samantar brahmand ban jayega jisme gandhi ji zinda honge. Aur apna ye mool brahmand rahega jisme gandhi ji mar chuke honge. To kya aapko aisa nahi lagta ki ye baate mahej ek kalpna hi hain!
    Is hisab se to anant brahmand hi ban jayenge? Jab ki hum abhi apne isi brahmand ke bare me jyada kuchh nahi jante!

    • अनमोल,

      हमारी भौतिकी अभी विकास मे है। कोई भी सिद्धांत यदि गणितीय रूप से गलत ना हो, तब उसे संभव माना जाता है। यह हो सकता है कि वह प्रायोगिक न हो। “अप्रायोगिक सिद्धांत” का अर्थ है वर्तमान उपलब्ध तकनीक द्वारा असंभव। यह भी ध्यान रहे कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रायोगिक भौतिकी से हमेशा आगे रहती है, यह फासला कुछ वर्षो से लेकर शताब्दियों तक का हो सकता है।

      इसलिये हर सिद्धांत महत्वपूर्ण होता है।

      गणितिय माडेल कहते हैं कि भूतकाल की यात्रा संभव है लेकिन हमारे पास उसकी तकनीक नही है। इसके लिये एक तरीका ऋणात्मक ऊर्जा(Negative Energy) के प्रयोग का है। ऋणात्मक ऊर्जा का अस्तित्व होता है, हम उसे प्रमाणित कर चुके है लेकिन हमारे पास उसे बड़े पैमाने पर बनाने की तकनीक नही है। दूसरा तरीका ऋणात्मक पदार्थ है जोकि प्रति-पदार्थ (antimatter),श्याम पदार्थ (Dark Matter) से भिन्न है। ऋणात्मक पदार्थ पर गुरुत्व बल का विपरीत प्रभाव होता है, उसके लिये यह बल प्रतिकर्षण करता है, लेकिन इसे अभी तक हम खोज नही पाये हैं। मेरे पास एक अंग्रेजी पुस्तक है, मिचीयो काकू की Physics of the Impossible , पढना चाहो तो उसकी इबुक भेज सकता हूं।

      भूतकाल मे जाकर महात्मा गांधी की हत्या से बचाने के उदाहरण मे मैने समांतर ब्रह्माण्ड के सिद्धांत का उदाहरण दिया है। क्वांटम भौतिकी मे कुछ भी निश्चित नही है, हर घटना की एक संभावना होती है। हर संभावित घटना से जुड़ा एक समांतर ब्रह्माण्ड होता है। इस उदाहरण मे हम अपने ब्रह्माण्ड के इतिहास को नही बदल सकते है, यदि हम उसे बदलने का प्रयास करें तो वह घटना किसी समांतर ब्रह्माण्ड मे होगी। इसे अच्छे से समझने के लिये अंग्रेजी फिल्म “बैक टू द फ्युचर” के तीनो भाग देखो। समय यात्रा पर एक बेहतरीन फिल्म है, इसमे दिखायी गयी घटनायें किसी भी विज्ञान के नियम का उल्लंघन नही करती है, केवल तकनीक कल्पित है।

  13. Ji,
    ye bhi theek hai, ki saiddhantik bhautiki aur prayogik bhautiki ke beech shatabdiyo ka antar ho sakta hai. Magar yadi kai shatabdiyo baad to aisa sambhav hota na! Aur agar aisa hota to yaha per kam se kam ek to kaal yatri zaroor aata. Bhale hum unke liye mahatvpoorn na ho, per wah kaalyaatri einstein ke pass to zaroor hi jata. Chahe aaj se hazaro saal baad hi aisi takneek viksit ho sake. Per aaj tak aisi koi bhi ghatna ki soochna nahi mili hai.
    Aur yadi aisi yatra sambhav hoti to manav uski taktneek zaroor hi khoj leta, bhale hi usme hazaro saalo ka samay lag jaaye.
    Discovery channel per hawking ka ek show time travell dekha tha. Usme hawking khud hi bata rahe the ki bhoot kaal me jaana sambhav nahi hai, na aaj aur na kabhi.
    Unhone bhavishya me jane ki takneek batayi, ki yadi hum aisa yaan bana sake jiski gati prakash ki gati ke kareeb ho, to hum bhavishya ki yatra kar sakte hain. Per itne adhik veg ka yaan banane mein bahut oorja ki zaroorat hogi jiske liye pahle negativ matter ka dohan karna seekhna hoga.

    Aur aap ebook bhej deejiye. Aur relativity pe jo kaam humne kiya hai kya use aapne dekha aur samjha hai?

    • अनमोल,

      तुम्हारे इस तर्क मे दम है लेकिन…. भविष्य के समययात्री हमारे कालखंड को इतना महत्वपूर्ण ना समझते हो कि इस कालखंड की यात्रा करें। यह भी हो सकता है कि वे हमारे आसपास हो लेकिन हमारे कार्यो मे कोई दखल ना देते हो।
      स्टार ट्रेक मे जब एन्टरप्राइज यान जब भी किसी भी नयी सभ्यता की खोज करता था,किसी आदिम सभ्यता को कोई तकनीकी सहायता नही देता था , यहां तक कि यदि वहां पर कोई युद्ध हो रहा हो तब भी किसी का पक्ष नही लेता था। ऐसा इसलिये कि वे चाहते थे कि हर सभ्यता अपने आप विकास करे, किसी छोटे रास्ते से नही।

      तुम्हारे काम को अभी देखा नही है, सप्ताहांत मे देखुंगा।

      • dear ashish ji ,is there anything like “important” / useless in the terms of theory science if it is then how newton could found out gravitation from the normal thing ” apple” . why we are spending trillions of dollars on lhc to find a most “nano” particle “hings -boson” if any time travel in past would be possible then they will not think that weather we r important or not for them to come in this era and visit the earth.i have one more mine basic hypothesis that, think if nature would not have given us the process and power of memory in our mind \cautious . then we would not be able to understand or know about the past every thing that happen at that time would be the spontaneous . in that case what would we have thought about the direction of time.surely the things we talk about time are highly related to our sensory perception and working of our cautious [chetana].so does it means that if we can memories so can feel past and think to go there as well as can think so we can feel future and tends to go there.please share your views.my cell nos are 09828043365 .

  14. ha ab inme se sirf ek baat samajh mein aati hai jo sahi lagti hai. Wo ye hai ki agar bhootkaal ki yatra sambhav hai to shayad bhavishya se aane wale jeev yaha per ho, per wo apna astitva chhipaye huve ho…
    Ha per aisa bhi ho sakta hai ki koi cheej ya kuchh aur unhe aisa karne se rokta ho, ki wo sirf bhootkaal mein aakar use sirf dekh sakte ho, per usme koi parivartan na kar sakte ho.
    Kyunki agar aisa na ho to koi na koi bhavishya se aane wala jeev raaz to khol hi sakta hai. Bhavishya ke Sabhi jeevo ki sonch ek jaisi to nahi ho sakti. Koi na koi to aisa karne ki koshish karega hi!
    Aur agar koi aisa karta to hume pata chal chuka hota ki such kya hai. Per aisa nahi hai. Aur agar hum bhavishya ke jeevo ki baat bhi karte hain to wo kitne bhavishya ke honge?
    Jab abhi bhootkaal ki yatra ke siddhant ki khoj ho chuki hai to prayogik taur per ise siddha karne me jyada se jyada 2-3 sau saal lagenge. Aur kuchh hi saalo me yatra bhi sambhav ho jayegi. Phir jab wo bhootkaal mein aayeinge, to jyada anraal to hoga nahi. To ab tak koi na koi baat to pata chal hi jani chahiye thi.

    Aur agar unhe koi shakti nahi rokti hai, to koi na koi apne bhoot ko badalne ka prayas bhi karega. Fir samantar brahmaand! Aur jo sirf kalpna hi lagti hai.

  15. दोस्तो मैने एक सबूत पाया है इसमें सच्चाई कितनी है कुछ नही कह सकते है पर आप सभी इस लिंक को देखें। इसमें किसी 400 साल के गुंबद में बंद किसी सौ साल पुरानी स्विस घड़ी के बारे में है अर्थात 400 साल पुराने गुंबद में 100 साल पुरानी घड़ी कैसे पहुंची कुछ तो है।

    http://www.dailymail.co.uk/sciencetech/article-1096959/Mystery-century-old-Swiss-watch-discovered-ancient-tomb-sealed-400-years.html

  16. यदि भूतकाल में जाकर गाँधी जी को बचाने पर एक नया ब्रह्मांड बन जायगा जिसमे गाँधी जी जीवीत होंगे ! तब तो वह कालयात्री उस ब्रह्मांड का रचियेता होगा ! तो क्या हम जिस ब्रह्मांड में रह रहे है वो किसी काल यात्री के द्वारा तो नहीं रचा गया है ? हम लोग मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में इसका क्या कोई प्रमाण है ?
    मान लेते है की सन ०१/०१/२०३० में टाइम मशीन बन कर समय यात्रा के लिए तैयार हो जाता है ! और तब के काल यात्री टाइम मशीन बनने के पीछे के समय में आ सकेंगे मतलब ३१/१२/२०२९ के समय में ? इस तारीख में तो टाइम मशीन पूरी तरह से तैयार ही नहीं हुआ था !यदि ऐसा हो
    सकता है तो भविष्य के यात्रिओ को हमारे बिच होना चाहिए !

    • तो क्या हम जिस ब्रह्मांड में रह रहे है वो किसी काल यात्री के द्वारा तो नहीं रचा गया है ? संभव है !
      हम लोग मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में इसका क्या कोई प्रमाण है ? दो समान्तर रेखाओ में असली का पता कैसे चले!

      संभव है कि कालयात्री हमारे मध्य हो लेकिन हमारे जीवन में हस्तक्षेप न कर पा रहे हो या हस्तक्षेप ना करना चाहते हो! स्टार ट्रेक में फेडरेशन का प्राइम डाइरेक्टिव है कि किसी भी नए खोजी सभ्यता के विकास में कोई हस्तक्षेप ना किया जाए, कोई तकनीकी सहायता भी नहीं, उसे स्वयं विकसीत ओने दिया जाए. भौतिकी के नियम भूतकाल में यात्रा से संभव है लेकिन शायद ये प्रायोगिक रूप से संभव ना हो.

      • आपके जवाब के लिए धन्यवाद
        (तो क्या हम जिस ब्रह्मांड में रह रहे है वो किसी काल यात्री के द्वारा तो नहीं रचा गया है ? संभव है !)
        (हम लोग मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में इसका क्या कोई प्रमाण है ? दो समान्तर रेखाओ में असली का पता कैसे चले! )
        तब तो बिगबैंग के बारे में हमारे सोच पर एक प्रकार से प्रश्न चिन्ह लग जाता है ! जब तक यह पता न चले हम कहा है तब तक !
        क्युकी हमें खुद ही पता नहीं है की हम मूल ब्रह्मांड में है या किसी समान्तर ब्रह्मांड में ?
        यदि भविष्य के काल यात्री हमारे मध्य में है तो उनके दवरा हमारे जीवन में किसी प्रकार के परिवर्तन न कर पाने की सबसे प्रमुख बाधा भौतिकी के नियम हो सकता है
        या यह भी हो सकता है की जैसे ही कोई काल यान हमारे काल खंड में प्रवेश करता है तो उनका अस्तित्व हमारे भुत काल और वर्त्तमान काल से जुड़ जाता हो जिसके
        चलते वे हमारे किसी भी काल से छेड़खानी करने में असमर्थ हो जाते होंगे और खुद के अस्तित्व के मिट जाने की डर भी हो सकता है !या फिर यह भी हो सकता है की
        भविष्य के काल यात्री होता ही नहीं ! होता भी है तो अस्थिर अनिश्चित जो हमारे सोच के साथ हमेसा बदल जाती है और उस दुनिया में पदार्थ नहीं बन पाते है जिसके कारण भविष्य के काल यात्री थोड़े समय के लिए बनते है और फिर अस्तित्व हिन् हो जाते है और यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है निरंतर ! एक बात मैंने ध्यान से देखा है की इन्सान का मन भी एक काल यान जैसा ही है जिसमे भुत काल और भविष्य काल दोनों में यात्रा करना सम्वाभ है ! भूतकाल में जा तो सकते है पर कुछ
        बदलाव न करने के शर्त पर ! और भविष्य काल में जाकर जैसे बर्तमान में आते है तो ही भविष्य एक नए रूप में अपने आप को बनाने को आमादा पाते है!
        आपके जवाब पाने के इन्तेजार में हु !

        बदलाव न करने के शर्त पर ! और भविष्य काल में जाकर जैसे बर्तमान में आते है तो ही भविष्य एक नए रूप में अपने आप को बनाने को आमादा पाते है!
        आपके जवाब पाने के इन्तेजार में हु !

      • समांतर ब्रह्मांड के निवासियों के लिये हमारा ब्रह्मांड समांतर होगा और उनका मूल! ये तो अपना अपना दृष्टिकोण होगा। बिग बैंग कहाँ हुआ महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि अंतरिक्ष सपाट नहीं है, इसमें कोई भी दो बिंदु के मध्य दूरी शून्य से लेकर कुछ भी हो सकती है। अंतरिक्ष में गुरुतवाकर्षण से वक्रता से दूरी कम हो सकती है।
        समय यात्रा के बारे एक मान्यता यह भी है कि वह पहली टाइम मशीन बनने के पश्चात ही संभव होगी। लेकिन यह अभी सभी अवधारणाये है, तथ्य तो भविष्य के गर्भ में है।

      • मित्र , मेरा प्रयास आपको एक परिकल्पना के माध्यम से ये एहसास करवाना था की यदि प्रकृति ने हमें अर्थात हमारी चेतना को किसी घटना को याद रखने की शक्ति \गुण नहीं दिया होता . ये इस तरह से है की जैसा हम गंणित में करते है की माना की पेड़ की ऊंचाई x है ” – तो मेरे मित्र इस अवस्था में जब की हम किसी घटना को याद नहीं रख पाएंगे तो हमारे लिए भूतकाल का अस्तित्व ही नहीं होगा . हम सिर्फ वर्तमान को ही महसूस कर पाएंगे .तो मेरे कहने का मतलब है की क्या उस परिकल्पित अवस्था में हमारे सिधांत जो हमने समय ,सापेक्षता व अन्तराल के लिए बनाये है जरुर कुछ अलग होते उसमे भूतकाल जैसी कोई अवधारणा ही नहीं होती तो क्या भोतिकी के सारे सिधांत मूलतः हमारी चेतना पर ही सीधे निर्भर करते है ? अर्थात जो समय की आभासी नकारात्मक दिशा जो भूतकाल को प्रदर्शित करती है वो वास्तव में केवल हमारे मस्तिस्क और चेतना का बुना जाल है यथार्त नहीं |और इसीलिए जब हम समय से सम्बंधित किसी भी शोध के अंत में जाते है तो यही पाते है की भूतकाल में जाना संभव नहीं , यदि है तो केवल आभासी उपस्थिति मात्र घटनाओ को प्रभावित किये बिना |ये तो यही सिद्ध करती है की हम घूम कर वापस चेतना ,मस्तिष्क एवं एहसास पर ही आ गए .

  17. Aaj bhee Insaan ko Prikriti Ke Bahut Se Rehsya Nahin Maloom, I am 100% sure a day came when we people can travel past and future but can not change it due certain laws/rules of nature, even If we can change it then Nature will adjust its effect and creates changes in new Universe. many thing we can not see. See How can we see past happening/phenomena –
    When we see object / happening, We see it with speed of light. Means light falls on object and reflected back and when it reach to our eyes, We see it.
    Similarly space telescopes (Hubbal etc. ) see any object/happening with a distance of 10 light years, then such happening occurs 10 years back and We see its past happened 10 years before.
    But if something travel faster than light (say double speed) then We see past of such happening 5 years before. Therefore relatively one is past and one is future.

    • muskan ji me apki baat se sehmat hu bahut bade rahasye chupe he humari nature me time travel ka sabse bada udharan he BARAMUDA TRAINGLE jahan jo bhi gaya he ya to vo wapis nahi aya aya he to vo ye batata he ki samaye wahan per ruk gaya tha koi bhi elctic ya magnetic field cheej wahan kam nahi karti ,,,,,,,,,,,

      • सुजीत, बरमूडा त्रिकोण कोई रहस्य नहीं है, एक अपवाह मात्र है। इस क्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या अन्य क्षेत्र से ज़्यादा नहीं है। ज़्यादा जानकारी के लिये वीकीपिडीया देखे।

  18. mai bus yeh kahna chahata ho bedo me jo kaha gaya hai sari baat galat nahi hai par iska matlab ye nahi bed hi sab kuch hai.bed likhne wale hrisi bhi baiganik the par unka khoj purane samay ke hisab se tha jo purna nahi the unhone jo kiya apne samay ke hisab se thik tha par ajj ke bigyaan ko yadi yeh kah diya jaye ye to bedo me likha hai to yeh murkhata hogi bed ek apurna shastra hai jo bigyaan ki sahi sahi privasa nahi kar sakta abhi to bahut si khoj hona baki hai maut par vijay dusre graho par manav sabhyata naye barhamaand kaa nirmaan time machine ko safal banana aur najaane kya bedo me yaadi sab likha hota tab koi bed padhkar aids,tb, ki dawa keon nahi bana deta kyoun manav in sab jaan kaari ke hote huyen paisa khach kar praog kar rahe hai yadi vedo me hi sab likha hota to hume kisi tarah ka praog nahi karna padhta yad rahe jo log bed ki rachna kiya hai un logo bijli kai jaankari nahi thi nahi motor banane ki o log rath par yuddha ke liye teer dhanus is tarah ke chijo ka istemaal kiya karte the.iska shidha matlab ye hai unki jaankari aaj ke muqale kafi pidcra aur purani thi dosto sari chijo ko bed puran se ya purane grantho se naa jod kaar adhunik baiganik abishkaar ko samarthan kare. dharm srif insaan ko kamjore bana sakti hai samasya hal nahi de sakti
    hai.kya kahi bedo me ye likha hai ki swarg ka location kya hai,maan ke gati prati seccond kya hai,puspak vimaan me kish traha ka injan laga tha? isliye Ashish ji ka saath dijiye aur vigyaan ke prachar ka unka prayash ko safal banaye taki hindustaan kaa har baccha baiganik bane aur ek eaisi duniya bana sake jisme sab inshan khus aur sukhi ho sake!
    aur yeh bigyan hi nahi sakta………………

  19. kya mai samay yatra ke jariye 2 mahine peeche ja sakta hu yaid haM to mujhe bataye

  20. kya mai samay yatra ke jariye 2 mahine peeche jakar kuch parivartan kar sakta hu

    • अजय,
      भूतकाल मे समययात्रा कर परिवर्तन हो सकता है या नही ? यह एक अनसुलझा प्रश्न है।

      यदि परिवर्तन संभव है तो वह कई विरोधाभास उत्पन्न करता है जिनकी इस लेख मे चर्चा हुयी है।
      दूसरी संभावना यह है कि यदि परिवर्तन संभव हो तो वह हमारे मूल ब्रह्माण्ड मे ना हो कर समानांतर ब्रह्माण्ड मे होंगे। मूल ब्रह्माण्ड जैसे का वैसा ही रहेगा।

  21. ye udn tastari jo hame kabhi kabhi dikhai padti hai kahin wo samay yan to nahi.
    ho sakta hai jinhe ham pargraha wasi samajh rahe hai wo samay yatri ho aur apne bhoot kal ko janne ki koshish kar rha ho.
    am i not right?

  22. Kya vratakar chumbak bahai ja sakta hai…yas..to kya vah alag prakar se karye karegi???

इस लेख पर आपकी राय:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: