ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सबसे प्रचलित तथा मान्य सिद्धांत के अनुसार अरबो वर्ष पहले सारा ब्रह्माण्ड एक बिंदू के रूप मे था। किसी अज्ञात कारण से इस बिंदू ने एक विस्फोट के साथ विस्तार प्रारंभ किया और ब्रह्माण्ड आस्तित्व मे आया। ब्रह्माण्ड का यह विस्तार वर्तमान मे भी जारी है। इसे हम महाविस्फोट का सिद्धांत(The Big Bang Theory) कहते है। एडवीन हब्बल द्वारा किये गये निरिक्षणो तथा आइंस्टाइन के सापेक्षतावाद के सिद्धांत ने इस सिद्धांत को प्रायोगिक तथा तार्किक आधार दिया।
१९९० दशक के मध्य मे कुछ खगोलशास्त्रीयों ने ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मापने के लिए कुछ प्रयोग किये। गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमान को आकर्षित करता है, इसलिए अधिकतर वैज्ञानिको का मानना था कि गुरुत्वाकर्षण बल ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति को मंद कर देगा या इस गति को स्थिर कर देगा।
इन प्रयोगो के नतिजे अनपेक्षित निकले। ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति ना कम हो रही थी, ना स्थिर थी, उल्टे वह बढ़ रही थी।
यह प्रयोग कुछ समूह १ए(Type 1A) के सुपरनोवाओं के निरिक्षण पर आधारित था। समूह १ए के सुपरनोवा ब्रह्मांडीय दूरीयो के मापन के लिए मानक दीपस्तंभो (Standard Lamppost or Standard Candles) के रूप मे प्रयोग किए जाते है। विभिन्न दूरीयों के सुपरनोवाओं के निरिक्षण से वैज्ञानिक भूतकाल मे देख सकते है क्योंकि प्रकाश को उन सुपरनोवाओं से हम तक पहुंचने मे अरबों वर्ष लगते है।
वैज्ञानिको ने भिन्न दूरीयो पर स्थित सुपरनोवाओं से उत्सर्जित प्रकाश का निरिक्षण किया जिससे उनके हमसे दूर जाने की गति की गणना की जा सके। यह गणना डाप्लर प्रभाव(Dopler Effect) के कारण उत्पन्न लाल विचलन(Red Shift) के मापन से की जाती है। यह निरिक्षण वैज्ञानिको को भूतकाल मे भिन्न भिन्न बिंदुओं पर ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति की मात्रा की जानकारी देने मे सक्षम था।
वैज्ञानिको ने पाया कि वर्तमान मे ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति भूतकाल मे ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति से अधिक है। यह आश्चर्यजनक था लेकिन सत्य था। यह प्रयोग एक ही समय मे वैज्ञानिको के दो अलग अलग समूहो ने किया था जिससे आंकड़ों मे या निरिक्षणो मे गलती की संभावना भी नही थी। इन सभी का अर्थ यही था कि कोई एक रहस्यमय बल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव को ना केवल उदासीन कर रहा था साथ मे ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति को त्वरित कर रहा था।
इसी रहस्यमय बल को श्याम ऊर्जा(Dark Energy) नाम दिया गया है। यदि श्याम ऊर्जा (Dark Energy) किसी विशेष प्रकार का प्रतिकर्षण वाला बल है। यह किसी भी पदार्थ(साधारण बार्योनिक पदार्थ,प्रति पदार्थ(Anti-Matter) या श्याम पदार्थ(Dark Matter)) से संबंधित नही है।
चन्द्रा अंतरिक्ष वेधशाला द्वारा श्याम ऊर्जा की पुष्टि
वैज्ञानिको ने हाल ही मे श्याम ऊर्जा के अस्तित्व को सुपरनोवा के अतिरिक्त नयी विधीयों से भी प्रमाणित किया है। यह नयी विधी चंद्रा एक्स रे वेधशाला के निरिक्षणो से प्राप्त आंकड़ों पर निर्भर है। इसके अनुसार श्याम ऊर्जा आइंस्टाइन के खगोलिय स्थिरांक(Cosmological Constant) का ही रूप है, जिसे आइंस्टाइन ने ही अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल(biggest blunder) कह कर नकार दिया था। इन प्रयोगो मे वैज्ञानिको ने कुछ आकाशगंगा समूह के द्रव्यमान मे कमी महसूस की है जो कि किसी श्यामऊर्जा के जैसे विदारक बल के कारण ही हो सकती है। वैज्ञानिको के अनुसार श्याम ऊर्जा का यह प्रभाव भविष्य मे तारो, ग्रहों को तथा हमारा निर्माण करने वाले अणुओ को भी फाड़ सकता है। (चन्द्रा अंतरिक्ष वेधशाला का नाम भारतीय मूल के वैज्ञानिक सुब्रमनियन चन्द्रशेखर के सम्मान मे दिया गया है।)
इस प्रयोग से जुड़े शिकागो विश्वविद्यालय के खगोल शास्त्र तथा खगोल भौतिकी विभाग के वैज्ञानिक माइकल टर्नर के अनुसार
“१० वर्ष पहले ब्रह्मांड के विस्तार मे गति मे त्वरण की खोज पर यदि किसी को संदेह था तब इस खोज से वह दूर हो जाना चाहीये।”
श्याम ऊर्जा की मात्रा
खगोल वैज्ञानिको के अनुसार ब्रह्माण्ड का कूल ७४% से ७६% भाग श्याम ऊर्जा से बना है, २०% से २२% भाग श्याम पदार्थ से तथा शेष ४ % साधारण पदार्थ से बना है। इस शेष ४% मे हम, हमारा सौरमंडल तथा हमारी आकाशगंगा शामिल है। ब्रह्माण्ड मे कितने नगण्य और तुच्छ है हम !
श्याम ऊर्जा बड़े पैमाने पर(ब्रह्मांडीय स्तर पर) कार्य करती है लेकिन छोटे पैमाने पर(आकाशगंगा) इसका प्रभाव नही होता है। इस कारण इस ऊर्जा का प्रभाव हम अपनी आकाशगंगा या हमारे सौर मंडल मे नही देखते है। इस ऊर्जा का प्रभाव स्थानिय आकाशगंगा समूह मे भी नही देखा गया है, हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी तथा पड़ोसी आकाशगंगा एन्ड्रोमीडा इसी समूह की सदस्य है।
क्या है श्याम ऊर्जा
आइंस्टाइन के साधारण सापेक्षतावाद के अनुसार ब्रह्मांडीय स्थिरांक निर्वात के घनत्व तथा दबाव से जुड़ा है। दूसरे शब्दो मे श्याम ऊर्जा , निर्वात की ऊर्जा है। इस व्याख्या के अनुसार श्याम ऊर्जा अंतरिक्ष(निर्वात) का गुणधर्म है।
आइंस्टाइन पहले व्यक्ति थे जिन्होने महसूस किया था कि निर्वात (अंतरिक्ष) का अर्थ शुन्य नही है। अंतरिक्ष “रिक्त स्थान” ही नही है, वह रिक्त स्थान होने के बावजूद कुछ विचित्र गुणधर्म रखता है। इन गुणधर्मो मे से कुछ को समझने की शुरुवात हुयी है। आइंन्सटाइन ने अंतरिक्ष का पहला गुणधर्म पाया था कि अंतरिक्ष “रिक्त स्थान” का निर्माण कर सकता है अर्थात अंतरिक्ष अपना विस्तार कर सकता है। आइंस्टाइन के साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत मे अंतरिक्ष का एक अन्य गुणधर्म के अनुसार अंतरिक्ष की अपनी ऊर्जा होती है जिसे उन्होने ब्रह्मांडीय स्थिरांक(cosmological constant) कहा था। यह ऊर्जा “रिक्त स्थान” की है इसलिए अंतरिक्ष के विस्तार के साथ इस ऊर्जा मे कमी नही आयेगी। ज्यादा रिक्त स्थान के निर्माण के साथ, रिक्त स्थान की ऊर्जा मे बढो़त्तरी होगी, जिसके परिणाम स्वरूप इस तरह की ऊर्जा ब्रह्माण्ड को और ज्यादा गति से विस्तार देगी।
दुर्भाग्य से कोई भी यह समझ नही पा रहा है कि इस ब्रह्मांडिय स्थिरांक(cosmological constant) का अस्तित्व क्यों है? क्यों इस ब्रह्मांडिय स्थिरांक(cosmological constant) का मूल्य ब्रह्मांड मे विस्तार उत्पन्न करने योग्य ऊर्जा के ठीक बराबर क्यों है?
क्वांटम सिद्धांत की एक दूसरी व्याख्या के अनुसार “रिक्त स्थान(अंतरिक्ष)” अस्थायी आभासी (virtual) कणो से बना है जो सतत रूप मे बनते और अदृश्य होते रहते है। लेकिन जब वैज्ञानिको के रिक्त स्थान(अंतरिक्ष) की इस ऊर्जा की गणना की, तब परिणाम अप्रत्याशित रूप से गलत निकले! यह गणना किया गया मूल्य वास्तविक मूल्य से १०१२०गुणा ज्यादा था। अर्थात १ के बाद १२० शून्य ! किसी गणना का इतनी बुरी तरह से गलत होना वैज्ञानिको के लीए शर्मनाक था ! रहस्य अभी बरकरार है!
श्याम ऊर्जा का ब्रह्माण्ड के भविष्य की संभावनाएं
ब्रह्माण्ड का भविष्य दो बलो के बीच की रस्साकसी पर निर्भर है। यह दो बल है, गुरुत्वाकर्षण बल तथा श्याम ऊर्जा। गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण बल है तथा पदार्थ के संकुचित करता है। इसी बल के फलस्वरूप सभी ब्रह्मांडिय पिंडो(आकाशगंगा, आकाशगंगा समूह, तारे, निहारिका, ग्रह इत्यादि) का निर्माण हुआ है। यह बल दृश्य पदार्थ (४% बार्योनिक पदार्थ) तथा २४ प्रतिशत अदृश्य श्याम पदार्थ द्वारा उत्पन्न होता है।
श्याम ऊर्जा रिक्त स्थान या निर्वात का बल है। यह ऊर्जा अंतरिक्ष का विस्तार करती है। ध्यान दे यह प्रतिगुरुत्वाकर्षण बल नही है यह दो पिंडो को एक दूसरे से दूर नही धकेलता है, यह दो पिंडो के मध्य रिक्त स्थान(अंतरिक्ष) का विस्तार करता है।
ब्रह्माण्ड का भविष्य इस तथ्य पर निर्भर है कि भविष्य मे कौनसा बल प्रभावी होगा। आज की स्थिती मे तीन संभावनाये बनती है।
१.महा संकुचन(Big Crunch) : यह उस स्थिती मे संभव है जब भविष्य मे किसी समय श्याम ऊर्जा अपना रूप परिवर्तन कर अंतरिक्ष के विस्तार की जगह अंतरिक्ष का संकुचन प्रारंभ कर दे। इस स्थिती मे गुरुत्वाकर्षण बल प्रभावी हो जायेगा और ब्रह्माण्ड संकुचित होकर एक बिन्दू के रूप मे सिकुड़ जायेगा। यह शायद एक और महाविस्फोट(Big Bang) को जन्म देगा। महा विस्फोट तथा महासंकुचन का यह चक्र सतत रूप से चलते रहेगा। यह एक संभावना मात्र है, अभी तक इस संभावना के पक्ष मे कोई प्रमाण नही मिले है।
२.स्थिर श्याम ऊर्जा (ब्रह्माण्डिय स्थिरांक) : इस स्थिती मे ब्रह्माण्ड का विस्तार अनंत काल तक जारी रहेगा। सभी आकाशगंगाएँ एक दूसरे से दूर होती जायेंगी। लेकिन आकाशगंगाओं के अंदर गुरुत्वाकर्षण प्रभावी रहेगा। अर्थात आकाशगंगाओं के अंदर तारे, सौर मंडल बने रहेंगे, वे गुरुत्वाकर्षण से बंधे रहेंगे।
३. महा-विच्छेद (Big Rip): यह एक भयावह स्थिती है। इस स्थिती मे ऊर्जा का घनत्व समय के साथ समान रहता है तब वैज्ञानिको के अनुसार ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति बढते जायेगी तथा अंतरिक्ष के विस्तार के साथ श्याम ऊर्जा की मात्रा बढ़ती जायेगी। । आकाशगंगाए एक दूसरे से क्रिया करने या विलय करने की बजाय एक दूसरे से दूर होते जायेंगी। भविष्य मे किसी समय यह गुरुत्वाकर्षण बल पर भी प्रभावी हो जायेगी, तब यह ऊर्जा आकाशगंगाओं, तारो, ग्रहो को चीर देगी। आज से अरबो वर्ष पश्चात हमारी आकाशगंगाओ का स्थानिय सूपरक्लस्टर भी टूट जायेगा और हमारी आकाशगंगा अकेली रह जायेगी। सभी अणुओ का भी विच्छेद हो जायेगा। जैसे कोई मिट्टी का ढेले के कण पानी मे डालने पर घूल कर एक दूसरे से अलग हो जाते है वैसे ही ब्रह्माण्ड का हर सूक्ष्म कण अलग अलग हो जायेगा। अभी तक के सभी निरिक्षण और प्रमाण इसी स्थिती की ओर संकेत कर रहे है।









