अक्टूबर 31, 2011
18 वीं तथा 19 वी शताब्दी मे न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत सर्वमान्य सिद्धांत बन चूका था। यूरेनस की खोज तथा ग्रहो की गति और पथ की सफल व्याख्या इसे प्रमाणित करती थी। नेपच्युन के खोजे जाने के पश्चात यह पाया गया था कि इसके पथ मे एक विचलन है जो किसी अज्ञात ग्रह के गुरुत्वाकर्षण से संभव है। इस विचलन आधारित गणना से अज्ञात ग्रह के पथ और स्थिति की गणना की गयी, इसके परिणामो द्वारा प्राप्त स्थान पर यूरेनस खोज निकाला गया था। इन सबके अतिरिक्त यह सिद्धांत तोप से दागे जाने वाले गोले की गति और पथ की गणना मे भी सक्षम था।
यह एक सफल सिद्धांत था, जिसके आधार मे कैलकुलस आधारित गणितीय माडेल था।
यह स्थिती 20 वी शताब्दी के प्रारंभ तक रही, जब 1905 -1915 के मध्य मे अलबर्ट आइंस्टाइन ने अपने विशेष और साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत से भौतिकी की जड़े हिला दी। पहले उन्होने सिद्ध किया कि न्यूटन के तीनो गति के नियम आंशिक रूप से सही है, वे गति के प्रकाशगति तक पहुंचने पर कार्य नही करते है। उसके पश्चात उन्होने न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को भी आंशिक रूप से सही बताया, यह भी अत्यधिक गुरुत्व वाले क्षेत्रो मे कार्य नही करता है।
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अक्टूबर 26, 2011
स्ट्रींग सिद्धांत यह कण भौतिकी का एक ऐसा सैद्धांतिक ढांचा है जो क्वांटम भौतिकी तथा साधारण सापेक्षतावाद के एकीकरण का प्रयास करता है। यह महाएकीकृत सिद्धांत(Theory of Everything) का सबसे प्रभावी उम्मीदवार सिद्धांत है जोकि सभी मूलभूत कणो और बलो की गणितीय व्याख्या कर सकता है। यह सिद्धांत अभी परिपूर्ण नही है और इसे प्रायोगिक रूप से जांचा नही जा सकता है लेकिन वर्तमान मे यह अकेला सिद्धांत है जो महाएकीकृत सिद्धांत होने का दावा करता है।
इस लेखमाला मे हम इस सिद्धांत को समझने का प्रयास करेंगे। इस लेख माला के विषय होंगे
- सैद्धांतिक भौतिकी और न्युटन
- सापेक्षतावाद और आइंस्टाइन
- क्वांटम भौतिकी और गुरुत्वाकर्षण
- स्ट्रिंग सिद्धांत क्यों ?
- स्ट्रिंग सिद्धांत क्या है?
- कितने स्ट्रिंग सिद्धांत है?
- क्या ये सभी स्ट्रिंग सिद्धांत एक दूसरे संबंधित है?
- क्या इससे ज्यादा मूलभूत सिद्धांत भी है?
- स्ट्रिंग सिद्धांत के अनसुलझे प्रश्न और आलोचना
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अक्टूबर 19, 2011
क्या आप जानते है कि समय यह अंग्रेजी भाषा मे सबसे ज्यादा प्रयुक्त संज्ञा है? “समय के बारे मे जानने योग्य कुछ महत्वपूर्ण तथ्य“, यह शीर्षक कुछ “दार्शनिक” अंदाज लिये हुये है, लेकिन आप तो विज्ञान से संबधित चिठ्ठे पर है!समय शायद एक ऐसा विषय है जो हर क्षेत्र मे उपस्थित है, धर्म, दर्शन शास्त्र या विज्ञान। पिछले कुछ समय से मै भौतिकी से संबधित लेखो को पढ़ रहा हूं, उनपर लेख लिख रहा हूं, कुछ शब्द जो बार बार आते है, वे है “समय“, “अंतराल/अंतरिक्ष” और “ब्रह्माण्ड”। यह लेख समय पर कुछ टिप्पणियों का संग्रहण है।
1.समय का आस्तित्व है। यह एक बहुत साधारण सा लगने वाला लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न है। क्या समय का अस्तित्व है? हां समय का अस्तित्व है, आखिर हम लोग अपनी अलार्म घड़ीयोँ मे से समय निर्धारित करते ही है! समय ब्रह्माण्ड को “क्षणो की एक व्यवस्थित श्रृंखला” मे रखता है। ब्रह्माण्ड हर क्षण भिन्न अवस्था मे रहता है, ब्रह्माण्ड की किसी भी क्षण की अवस्था, किसी अन्य क्षण की अवस्था के समान नही होती है। यदि समय इन अवस्थाओं को एक व्यवस्थित श्रृंखला मे न रखे तो अनुमान लगाना कठिन है कि कैसी अव्यवस्था होगी। वास्तविक प्रश्न है कि क्या समय मूलभूत है अथवा उत्पत्ती है? एक समय हम मानते थे कि तापमान प्रकृति का बुनियादी गुणधर्म है, लेकिन अब हम जानते है कि वह परमाणु के आपसी टकराव से उत्पन्न होता है। लेकिन क्या समय की उत्पत्ती होती है, या वह ब्रह्माण्ड का बुनियादी गुणधर्म है ? इसका उत्तर कोई नही जानता है। लेकिन मै अपनी शर्त इसके बुनियादी गुणधर्म होने पर लगाउंगा लेकिन इसे सिद्ध करने हमे “क्वांटम गुरुत्व” को समझना जरूरी है।
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अक्टूबर 12, 2011
लगभग 13 वर्ष पहले यह खोज हुयी थी कि ब्रह्माण्ड की अधिकांश ऊर्जा तारों या आकाशगंगा मे ना होकर अंतराल(space) से ही बंधी हुयी है। किसी खगोलवैज्ञानिक की भाषा मे एक विशाल खगोलीय स्थिरांक (Cosmological Constant) की उपस्थिति का प्रमाण एक नये सुपरनोवा के निरीक्षण से मीला था।
पिछले तेरह वर्षो मे स्वतंत्र वैज्ञानिको के समूहों ने इस खगोलीय स्थिरांक की उपस्थिति के समर्थन मे पर्याप्त आंकड़े जुटा लीये है। ये आंकड़े प्रमाणित करते है कि एक विशाल खगोलीय स्थिरांक अर्थात श्याम ऊर्जा(Dark Energy) का अस्तित्व है। इस श्याम ऊर्जा के परिणाम स्वरूप ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मे तेजी आ रही है। इस खोज के लिए वर्ष 2011 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार तीन खगोल वैज्ञानिको साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter), ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt) तथा एडम रीस(Adam G. Riess) को दीया जा रहा है।

2012 के भौतिकी नोबेल पुरस्कार विजेता : एडम रीस(Adam G. Riess), साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter) तथा ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt)
2011 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं की खोज पर समर्पित यह लेख श्याम ऊर्जा पर बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्नो का उत्तर देने का प्रयास करता है। इस विषय पर दो लेख लेख 1 तथा लेख 2 भी पढें।
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अक्टूबर 4, 2011
प्रकृति को पूरी तरह से समझना अब तक मानव मन के बूते के बाहर रहा है। मानव ने अपने इतिहास मे प्रकृति के कई रहस्य खोजे, ढेर सारे प्रश्नो का उत्तर पा लिया लेकिन उतने ही नये अनसुलझे रहस्य सामने आते गये है। मानव आज अपनी मातृभूमि पृथ्वी की सीमाओं को लांघ कर चंद्रमा तक जा पहुंचा है, उसके बनाये अंतरिक्ष यान सौर मंडल की सीमाओं को लांघ कर दूर अंतरिक्ष मे जा चूके है। हम आज किसी भी आकाशीय पिंड को देखकर, उसकी गति जान सकते है और बता सकते है कि अगले क्षण , अगले माह, अगले वर्ष या अगले सहस्त्र वर्षो पश्चात वह कहां होगा। इस गणना मे किसी चूक की भी कोई गुंजाइश नही है। हमारे पंचांग भी सदियों से हर एक नक्षत्र के उदय अस्त होने का समय तथा हर एक ग्रहण का अचूक समय बताते आ रहे है।
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