सरल क्वांटम भौतिकी: ब्रह्माण्ड को कौन बांधे रखता है ?


अब हम अच्छी तरह से जानते हैं कि विश्व किस से बना है : क्वार्क और लेप्टान से। ठीक है…

लेकिन विश्व एक साथ कैसे बंधा है ? क्यों क्वार्क मिलकर प्रोटान/न्युट्रान बनाते है ? कैसे प्रोटान न्युट्रान से परमाणु, परमाणुओं से अणु, अणुओं से पदार्थ, पदार्थ से ग्रह, तारे, आकाशगंगा और ब्रह्माण्ड बने है ?

यदि आपने इस श्रृंखला के प्रारंभिक लेख नही पढ़े है, तो आगे बढ़ने से पहले उन्हे पढ़ें।

  1. मूलभूत क्या है ?
  2. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 1?
  3. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 2?

चार मूलभूत प्रतिक्रियायेँ

4 मूलभूत प्रतिक्रियाएँ

4 मूलभूत प्रतिक्रियाएँ

हमारी अपनी  जानकारी की सीमाओं के अंतर्गत अपने प्यारे  ब्रह्माण्ड का अस्तित्व इसलिए है क्योंकि मूलभूत कण आपस में प्रतिक्रिया(interaction) करते हैं। इन प्रतिक्रियाओं में आकर्षण और प्रतिकर्षण के साथ क्षय(decay) और विनाश(inhalition) का समावेश है।

कणों के मध्य में चार मूलभूत प्रतिक्रियाएं होती है और समस्त विश्व के बलों को इन चार प्रतिक्रियाओं से समझा जा सकता है।

हाँ यह सही है, केवल चार प्रतिक्रियायें ! कोई भी बल आप सोचें, घर्षण, चुंबकत्व, गुरुत्वाकर्षण, नाभिकीय क्षय और अन्य.. यह सभी इन चारों मूलभूत प्रतिक्रियाओं में से किसी एक के फलस्वरूप है।

प्रतिक्रिया और बल के मध्य क्या अंतर है?

इन दोनों के मध्य अंतर बताना कठिन है। सही मायनों में बल एक कण द्वारा दूसरे कण की उपस्थिति से उत्पन्न प्रभाव है। कणों की आपसी प्रतिक्रिया में सभी बलों का समावेश होता है लेकिन प्रतिक्रिया में कणों के क्षय और विनाश का भी समावेश होता है। अगले भाग में कणों के क्षय और विनाश को हम विस्तार से देखेंगे।

भ्रम का कारण यह है कि अधिकतर लोग, अधिकतर वैज्ञानिक भी “बल(force)” और “प्रतिक्रिया(interaction)” को एक दूसरे की जगह प्रयोग करते हैं। कणों की आपसी प्रतिक्रिया के लिए बल की जगह प्रतिक्रिया ज्यादा सही शब्द है। हम यह कह सकते हैं कि जो कण प्रतिक्रिया करते हैं “बल वाहक कण(Force Carrier Partilces)” कहलाते हैं। कणो की आपसी प्रतिक्रिया के फलस्वरूप बल(force) का आभास होता है। आप इन दोनों शब्दों को एक दूसरे की जगह प्रयोग कर सकते हैं लेकिन आप को इन दोनों के मध्य अंतर स्पष्ट होना चाहिये।

पदार्थ परस्पर प्रतिक्रिया कैसे करता है?

भौतिक वैज्ञानिकों के मन में सदियों से एक पेचीदा प्रश्न रहा है….

पदार्थ के कण परस्पर प्रतिक्रिया कैसे करते हैं?

चुंबकिय प्रतिक्रिया

चुंबकिय प्रतिक्रिया

समस्या यह है कि इनकी परस्पर प्रतिक्रिया एक दूसरे को स्पर्श किये बिना भी होती है। दो चुंबक एक दूसरे की उपस्थिति कैसे जान लेते हैं और कैसे एक दूसरे को आकर्षित या प्रतिकर्षित करते हैं ? सूर्य पृथ्वी को कैसे आकर्षित करता है ?

हम इसका उत्तर जानते हैं कि यह “चुंबकत्व” और “गुरुत्व” के कारण है। लेकिन ये बल क्या है?

मूलभूत स्तर पर , एक बल किसी कण पर होने वाला प्रभाव नहीं है। वह दो कणों के मध्य आदानप्रदान(exchange) करने वाली वस्तु है।

अदृश्य प्रभाव

आप बलों की तुलना निम्नलिखित स्थिति से कर सकते हैं:

दो व्यक्ति बर्फ की सतह पर खड़े है। एक व्यक्ति अपने हाथ में पकड़ी बास्केटबाल को दूसरी व्यक्ति की ओर फेंकता है। न्यूट्रॉन के तीसरे नियम के अनुसार फेंकने की प्रक्रिया की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप  वह व्यक्ति भी पीछे जायेगा। दूसरा व्यक्ति जब उस गेंद को पकड़ेगा, तो वह बास्केटबाल की गति के विपरीत बल लगायेगा, प्रतिक्रिया स्वरूप वह भी पीछे जायेगा।  इस तरह से दोनों व्यक्ति गेंदों के आदान-प्रदान में एक दूसरे से दूर जाते जायेंगे। स्केट के मैदान पर यह करके देखीये। गेंद फेकने के पश्चात आप पीछे जायेंगे। यह आप किसी चिकनी सतह पर खड़े होकर भी कर सकते है।

प्रतिकर्षण बल

प्रतिकर्षण बल

पदार्थ कणों के मध्य बलों के प्रभाव के लिये भी ऐसी ही प्रक्रिया होती है, वे बल वाहक कणों का आदान-प्रदान करते हैं। ये बलवाहक कण पदार्थ कणों के मध्य बास्केटबाल का कार्य करते हैं, जबकि पदार्थ कण इन दो व्यक्तियों की तरह होते हैं। जिसे हम प्रयुक्त “बल” मानते हैं, वह बलवाहक कणों के आदान-प्रदान का पदार्थ कणों पर प्रभाव मात्र होता है।

आकर्षण बल

आकर्षण बल

बास्केट बाल फेंकने वाला का चित्र केवल प्रतिकर्षण बल की व्याख्या कर रहा है, इससे बल वाहक कणों के आदान प्रदान से आकर्षण बलों के व्यवहार को नहीं समझा जा सकता है। आकर्षण करने वाले बलों को समझने के लिए हमें बास्केटबाल को एक चिपचिपी गेंद से बदलना होगा। इस चिपचिपी गेंद के आदान प्रदान में गेंद का चिपचिपापन उन दोनों व्यक्तियों को पास लाएगा। लेकिन ध्यान दें कि क्वांटम भौतिकी जटिल गणितीय मॉडल पर आधारित है, इसके हर पहलू को इस तरह के उदाहरणों से समझना थोड़ा कठिन है।

हम रोजमर्रा के जीवन में आकर्षण बलों के उदाहरण जैसे चुंबक और गुरुत्वाकर्षण को देखते हैं और हम मानते हैं कि किसी पिंड की उपस्थिति मात्र से दूसरे पिंडों पर उसका प्रभाव पड़ता है। इससे एक और पेचीदा प्रश्न खड़ा होता है कि कैसे दो पिंड एक दूसरे को बिना स्पर्श किये प्रभावित कर सकते हैं? इसके लिये हम सुझाव देते हैं कि अदृश्य बल वस्तुतः बल वाहक कणों के आदान प्रदान से उत्पन्न होता है। कण भौतिक वैज्ञानिकों ने अविश्वसनीय सटीकता से यह प्रमाणित किया है कि एक कण द्वारा दूसरे कण पर लगाया गया बल बलवाहक कणों के आदान प्रदान से उत्पन्न होता है।

एक महत्वपूर्ण तथ्य ध्यान में रखना चाहिये कि एक विशेष बल वाहक कण किसी पदार्थ कण द्वारा उसी स्थिति में उत्सर्जित या अवशोषित किया जा सकता जब वह पदार्थ कण उस बल वाहक कण द्वारा प्रभावित होता हो। उदाहरण के लिये, इलेक्ट्रॉन और प्रोटान में विद्युत आवेश होता है, इसलिए वह विद्युत-चुंबक बल वाहक कण फोटान का उत्सर्जन/अवशोषण कर सकते हैं। न्यूट्रीनो में विद्युत आवेश नहीं होता है, वे फोटान का उत्सर्जन/अवशोषण नहीं कर सकते हैं।

विद्युत-चुंबकत्व (Electro-Magnetism)

विद्युत-चुंबक

विद्युत-चुंबक

विद्युत-चुंबकीय बल समान आवेश में प्रतिकर्षण और विपरीत आवेश में आकर्षण उत्पन्न करता है। रोजाना के कई बल जैसे घर्षण तथा चुंबकत्व भी विद्युत-चुंबकीय बल के कारण है। उदाहरण के लिये आपको फर्श के आरपार गिरने से बचाने वाला बल या दीवार के आर-पार जाने से रोकने वाला बल भी विद्युत-चुंबकीय बल है जो आपके शरीर के परमाणुओं और फर्श(या दीवार) के परमाणुओं के मध्य प्रतिकर्षण उत्पन्न कर उन्हें आर पार जाने से रोकता है।

विद्युत-चुंबकीय बल का वाहक कण फोटान(γ) है। भिन्न भिन्न ऊर्जाओं पर फोटान विद्युत चुंबक वर्णक्रम पर फैले होते हैं, जो कि X किरण, दृश्य प्रकाश, रेडियो तरंग का भी समावेश करता है।

फोटान का द्रव्यमान शून्य होता है और वह प्रकाशगति (c) से चलता है, c का मूल्य निर्वात में लगभग 300,000,000 मीटर/सेकंड है।

अवशिष्ट विद्युत-चुंबकत्व(residual electro-magnetism)

अवशिष्ट विद्युत-चुंबकत्व

अवशिष्ट विद्युत-चुंबकत्व

सामान्यतः परमाणुओं में समान संख्या में प्रोटान और इलेक्ट्रॉन होते हैं। वे विद्युत रूप से उदासीन होते हैं क्योंकि प्रोटान का धनात्मक आवेश , ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन द्वारा रद्द हो जाता है। जाब वे उदासीन होते हैं तब स्थायी अणुओं का निर्माण कैसे होता है?

इसका उत्तर थोड़ा विचित्र है: यह पाया गया है कि एक परमाणु का आवेशित भाग दूसरे परमाणु के आवेशित भाग से प्रतिक्रिया कर सकता है। इससे भिन्न परमाणुओं का एक दूसरे से जुड़ना संभव होता है। इस प्रभाव को अवशिष्ट विद्युत-चुंबकीय बल कहते हैं।

इस तरह से विद्युत-चुंबक बल जो परमाणुओं को बांध कर अणु बनाता है, विश्व के एक साथ बंधे रहने और पदार्थ के निर्माण के लिए उत्तरदायी है। है ना आश्चर्यजनक!

यह तो समझ मे आ गया कि परमाणु आपस मे बंधकर अणुओं और पदार्थ का निर्माण कैसे करते है! लेकिन परमाणु के अंदर प्रोटान, न्युट्रान और इलेक्ट्रान कैसे बंधे रहते है ?

अगले भाग मे परमाणु को कौन बांधे रखता है?

यह लेख श्रृंखला माध्यमिक स्तर(कक्षा 10) की है। इसमे क्वांटम भौतिकी के  सभी पहलूओं का समावेश करते हुये आधारभूत स्तर पर लिखा गया है। श्रृंखला के अंत मे सारे लेखो को एक ई-बुक के रूप मे उपलब्ध कराने की योजना है।

36 Responses to “सरल क्वांटम भौतिकी: ब्रह्माण्ड को कौन बांधे रखता है ?”

  1. Ji,
    ye baat to samajh mein aa gayi, per ye bataiye ki 0 dravyamaan ka kan kaise sambhav hai?
    Foton ka dravyamaan

    E=mc^2 (einstein)
    E=hv (planc)

    mc^2=hv
    m=hv/c^2

    matlab foton ka mass ‘hv/c^2′ nahi hua?

    Aur relativity ke hisab se agar kisi kan ki velocity ‘c’ hogi to uska mass ‘infinite’ ho jayega.

    .
    Ab iska kya matlab hua?

  2. ab ek aur prashn!
    Kisi bhi kan jaise electron ka Aavesh kaise pata chalta hai? Hum kaise kah sakte hain ki ye nigativly charge particle hai?

    • धन और ऋण एक मान्यता मात्र है। उसे उलट भी दें तो कोई फर्क नही पड़ेगा।

      अब इलेक्ट्रान और प्रोटान के आवेश के बारे मे, इसे जांचने के लिये विद्युत क्षेत्र का प्रयोग करते है। इसके लिये एक चैंबर मे एक ओर धनात्मक विद्युत क्षेत्र और दूसरी ओर ऋणात्मक विद्युत क्षेत्र बनाया जाता है। जब इस चेंबर मे इलेक्ट्रान का उत्सर्जन होता है तब वह धनात्मक विद्युत क्षेत्र की ओर मुडता है। विपरीत आवेश मे आकर्षण होता है;इसलिये उसका आवेश ऋणात्मक माना जाता है।
      इसी तरह प्रोटान ऋणात्मक क्षेत्र की ओर मुड़ता है , इसलिये उसका आवेश धनात्मक माना जाता है।

  3. bas ek aur..!
    Grutvakarshan ka ki kriya bhi wahak kano ke karan hoti hai?
    Agar haan, to us particle ka naam aur 2-3 proparties bata deejiye. Aur quark aur lepton aur foton ke beech kya antar hai?

  4. अनमोल,

    E=mc^2 का अर्थ है कि पदार्थ और ऊर्जा एक ही है। ऊर्जा को दो तरह से देखा जा सकता है, कार्यरत ऊर्जा तथा विराम पर ऊर्जा(energy at rest)।

    सामान्य पदार्थ अर्थात विराम पर ऊर्जा(energy at rest)। यहाँ ऊर्जा संघनित हो कर पदार्थ के द्रव्यमान रूप मे है।

    फोटान और उसके जैसे बलवाहक कण : ये केवल और केवल ऊर्जा है, अर्थात कार्यरत ऊर्जा है।

    अधिकतर पदार्थ कण जैसे ईलेक्ट्रान/प्रोटान दोनो रखते है, कार्यरत ऊर्जा और विराम पर ऊर्जा। दूसरे शब्दो मे गतिज ऊर्जा(Kinetic Energy) तथा विराम पर ऊर्जा अर्थात द्रव्यमान।

    एकदम सरल रूप मे कहें तो शून्य द्रव्यमान वाले कणो मे सम्पूर्ण ऊर्जा कार्यरत होती है।
    अशून्य द्रव्यमान वाले कणो मे ऊर्जा दोनो रूपो(द्रव्यमान और कार्यरत ऊर्जा) मे होती है।

  5. achchha ye bataiye ki jaise hum kamre mein light jalate hain, to fotons poore kamre me bhar jate hain? Per Tabhi light off karne per turant andhera ho jata hai. Iska matlab kya hua? Ye saare fotons kaha chale jate hain? Matlab inki bhi aayu hoti hai kya? Kitne naino second hoti hai foton ki aayu?

    • ऊर्जा की अविनाशिता का नियम भूल गये ? ऊर्जा का निर्माण और विनाश असंभव है, उसे केवल एक रूप से दूसरे रूप मे बदला जा सकता है।जब बल्ब के पास हाथ रखते हो तब क्या होता है, हाथ गर्म होता है या नही ? यहां पर तुम्हारे हाथ के पदार्थ कण फोटानो का अवशोषण कर रहे है। तुम्हारे हाथो के कणो की ऊर्जा बढ़ रही है।

      जब भी फोटान किसी पदार्थ कण से टकराता है, उस पदार्थ कण द्वारा अवशोषित हो जाता है और उस पदार्थ कण की ऊर्जा बढ जाती है।

      इससे उल्टी प्रक्रिया मे बल्ब के फिलामेंट मे विद्युत धारा के प्रभाव से वह गर्म होकर फोटानो का उत्सर्जन प्रारंभ कर देता है। उष्मा, गर्मी, विद्युत, चुंबक सभी फोटानो के कारण है। फोटान और कुछ नही ऊर्जा का पैकेट है। क्वांटम अर्थात पैकेट!

  6. achchha, ab samajh mein aa gaya ki foton hamari deewar se takrakar use energy de dete hain. Matlab hamare ghar ki deeware garam ho rahi hain?
    Aur waise jab foton ghar ki deewaro ke atom ke electron per jayega to electron foton se energy lekar atom se bahar aa jayega. Kuchh bhi ho!
    Khair

  7. aur haan agar ‘working energy’ ko prayogshala me hi mass me change karna sambhav hai, to fir foton me energy to hai hi ‘hv’ ke barabar. Aur fir jab wo mass me convert hoga to ‘hv/c^2′ ke barabar uska mass to nikal hi aayega. To fir foton me mass to hoga hi.
    .
    Matlab ye hua ki swatantra roop se agar dekhe to foton ka mass 0 hoga, aur waise to…. Aap bataiye!

    • अनमोल,

      द्रव्यमान और ऊर्जा को अलग कर मत सोचो! दोनो एक ही चीज के दो रूप है। विराम पर ऊर्जा अर्थात द्रव्यमान। E=mc2यही दर्शा रहा है !

      ध्यान दो, कि पिछले लेख मे क्वार्क और इलेक्ट्रान के द्रव्यमान को हमने GeV/c2 मे मापा था जोकि ऊर्जा की इकाई है।
      फोटान की ऊर्जा प्लैंक के स्थिरांक(hv) को भी हम इसी इकाई मे मापते है।

  8. fir bas itna bataiye ki foton ko dravyamaan rahit particle kyun kaha jata hai, jabki usme energy hoti hai, matlab dravyamaan bhi hota hai.

    • तकनिकी तौर पर तुम सही हो। लेकिन सामान्य भाषा मे द्रव्यमान का अर्थ है विराम पर ऊर्जा, जो फोटान मे शून्य है। इसलिये फोटान को द्रव्यमान रहित कण कहते है।

      सामान्य भाषा मे ऊर्जा : कार्यरत ऊर्जा

      विराम पर ऊर्जा और कार्यरत ऊर्जा मे अंतर दर्शाने के लिए दो भिन्न शब्दो का प्रयोग होता है, लेकिन भौतिकी की गणनाओं मे दोनो को एक ही तरह से मापा जाता है, एक ही तरह से माना जाता है।

  9. Kahne ka matlab ye hai ki koi bhi particle massless kaise ho sakta hai? Agar wo massless hai, to hum uske astitva ke bare me kaise jaan pate hain? Wo to dikhta bhi nahi hoga.!

    • अनमोल, तुम समझने का प्रयास नही कर रहे हो!

      प्रकाश किरणे फोटान से बनी होती है, तुम्हे उसका प्रभाव दिखायी देता है या नही ? उसे महसूस करते हो या नही ?

      द्रव्यमान हो या नही, इन कणो का एक प्रभाव होता है, इस प्रभाव को देखा जा सकता है, जांचा जा सकता है।

      फिर से कह रहा हूं कि शून्य द्रव्यमान अर्थाय विराम पर ऊर्जा शून्य है, उस कण की संपूर्ण ऊर्जा कार्यरत(Energy at Work) है।

  10. agar sooraj abhi turant gayab ho jaye to yaha kitni der baad pata chalega? Agar turant pata chalta hai to isse einstein ke niyam ka khandan hota hai, kyunki prakash ke veg se adhik veg sambhav nahi hai. Matlab hame 8 minut baad pata chalega. Aur agar 8 minut ki baat mane to isse newton ke niyam ka khandan hota hai, kyunki unhone kaha tha ki prathvi gurutvakarshan ke karan sooraj ka chakkar lagati hai aur gurutvakarshan ka prabhav tatkaal hota hai. Matlab newton ke hisab se hame turant pata chal jana chahiye, aur einstein ke hisab se 8 minut ke pahle to sambhav hi nahi hai!

  11. अच्छा ज्ञान ..
    टिप्पणी पढ़ कर और भी अच्छा लगा

  12. Achha ik baat bataiye ki ap anmol ko bataye hai ki jab koi body motion kar rahi hogi to usme ka pura ka pura mass energy mai change ho jayega but einstine ke according jab kisi body ka velocity hum incress karne lage to uska mass bhi incress hone lagta hai, bt ap kah rahe hai jab body working state mai ho to uska pura mass energy mai change ho ja raha hai.
    Iska means kya hua plz bataiye…?

    • श्रावण,

      1.अनमोल के साथ चर्चा मे हमने सिर्फ फोटान (या कोई अन्य बलवाहक कण) की चर्चा की है। फोटान मे सारी ऊर्जा “कार्यरत ऊर्जा” होती है, और विराम-ऊर्जा (द्रव्यमान) शून्य होता है। अन्य पदार्थ कणो(प्रोटान/इलेक्ट्रान/क्वार्क इत्यादि) मे दोनो ऊर्जा होती है।

      2.आइंस्टाइन के अनुसार पिंड(body/object) की गति बढ़ने पर उसका द्रव्यमान बढ़ते जाता है, यह सत्य है। फोटान का द्रव्यमान शून्य है इसलिये वह प्रकाशगति प्राप्त कर सकता है। अन्य पिंड(body/object) का द्रव्यमान शून्य नही है, इसलिये वह प्रकाश गति प्राप्त नही कर सकते। गति के साथ द्रव्यमान क्यों बढ़ता है, इसे समझाने मुझे गणितीय समीकरण का प्रयोग करना होगा और उत्तर बड़ा हो जायेगा। थोड़ा इंतजार किजीये, मै अपने अगले लेंखो मे इसे समझाने का प्रयास करता हूं।

  13. Mai App ke sabhi lekho ka read kiya bahut hi achha laga, kuch question hai, apne jo time travel, ailiyan aur universe ke baare mai jo likha use hi lekar ik question hai, big bang ke acording, universe abhi to spread kar raha hai, aur hamare universe mai billiyan, triliyan planet hai to jarur kahi na kahi life to hogi hi, aur if possibal hua to hum time travel bhi kar sakte hai… Ha to sabse pahle universe ki origin ik small bindu se hui, par jara sochiye ki uske pahle kya raha hoga, sayad kuch nahi, to iska matlab hua ki universe aur time dono ik saath suru huye honge, aur jab future mai hamara universe fir se ik bindu ke rup mai ho jayega to sayad us time bhi samay ruk jaana chahiye, iska matlab hum isase pahle ke aur iske bad ke time mai nahi ja sakte ku ki us time, time hai hi nahi. To jo ailiyan hai wo bhi nahi ja paye honge iska matlab hum unse mil sakte hai. Agar aisa nai hai to sayad hamara univers future mai aur bhi spread hoga wo nai sikudega. Bas mai ye puchhana chahta hu ki kya time ki suruwat aise hi hui hogi? If nahi to plz mujhe iske baare mai broad jaankari de….

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