१,२,३,४,५,…….
1,2,3,4,5,……
I,II,III,IV,V,……
अंक, संख्याये, हर किसी के जीवन का एक अनिवार्य भाग! मानव इतिहास से जुड़ा हुआ एक ऐसा भाग जो किसी ना किसी ना किसी रूप मे हमेशा मौजूद रहा है, चाहे वह हड्डीयो पर, दिवारो पर बनाये हुये टैली चिन्ह हों, किसी धागे मे बंधी हुयी गांठे , भेडो़ की गिनती के लिये रखे गये छोटे पत्त्थर या आधुनिक लीपी के भारतीय अंतराष्ट्रीय अंक!
जब अंको की, संख्या की चर्चा चल पडी है, चर्चा का प्रारंभ तो इसके उद्गम से होना चाहीये ना! मेरा आशय अंको के इतिहास से नही है, मेरा आशय सबसे प्रथम अंक से है! सबसे प्रथम अंक कौनसा है ?
शून्य (0) या एक (1) ?
एक (1) सभी जानते है, यह ईकाई है। हर गिनती की शुरुवात इसी से होती है, तो सबसे प्रथम ’एक’ ही होगा। यह क्या ? प्रथम तो स्वयं ही एक से जुड़ा है। सबसे प्रथम अंक कौनसा है ? प्रश्न को थोड़ा बदला जाये! सबसे प्रारंभिक अंक कौनसा है ?
क्या शून्य को प्रथम अंक माना जाये?
लेकिन शून्य क्या है? किसी की भी अनुपस्थिती को शून्य कहते है। सबसे प्रश्न तो प्रश्न यही है कि क्या शून्य अपने आप मे अंक या संख्या है ?
गणितज्ञो की माने तो शून्य एक संख्या है। दार्शनिको की माने तो शून्य निराकार है, भगवान है! लेकिन हमारे प्रश्न का क्या ? क्या शून्य से प्रारंभ किया जा सकता है ? किसी भी की अनुपस्थिति अवश्य ही एक प्रारंभिक बिंदू हो सकती है!
यह तय रहा कि गिनती का प्रारंभ शून्य से होगा, एक से नही! आप क्या सोचते है?
गिनती का अंत कहां होता है?
सबसे बड़ा अंक कौनसा है ? क्या आप सबसे बड़े अंक को जानते है ? यदि आपकी जानकारी का सबसे बड़ा अंक N है, तो N+1 उससे बड़ा होगा।
भारतीय तो बड़ी सख्याओं के पिछे पागल रहे है। भारतीय ग्रंथो मे तो लक्ष(105), करोड़(107), अरब(109) से लेकर पद्म(1015), शंख(1017), महाशंख(1019) से लेकर असंख्येय(10140) तक की संख्याओं का उल्लेख है। कुछ ग्रंथो मे इससे बडी़ संख्याओं का उल्लेख भी है।
वर्तमान मे प्रयुक्त बड़ी संख्याओं मे के googol (गूगोल) है, इसका मान 10100 है। अर्थात 10 के पिछे 100 शून्य। यह इतनी बड़ी संख्या है कि इससे मानव शरीर के परमाणुओं की गिनती की जा सकती है।
इससे बड़ी संख्या गूगोलप्लेक्स है, जो कि 10googol है। यह इतनी बड़ी संख्या है कि इस संख्या के एक अंक को लिखने के लिये एक बिंदु का प्रयोग हो तो अब तक का ज्ञात ब्रह्माण्ड इसके लिए छोटा पड़ेगा!
क्या आप इससे बड़ी संख्या सोच सकते है ? आप कहेंगे कि इससे बड़ी संख्या हमारे किस कार्य की है। लेकिन एक गणितज्ञ ऐसा नही कहेगा, क्योंकि गणित मे प्रयुक्त एक संख्या इससे बढ़ी है, इसे ग्राह्म की संख्या(Grahm’s Number) कहते है। इस संख्या को लिखना असंभव है। इस संख्या के अंकों को लिखने के लिये यदि हम प्लैंक दूरी(1.616199×10−35 मीटर) मे एक अंक को लिखे तब भी समस्त ज्ञात ब्रह्माण्ड इसके लिये कम है।
किसी गणितज्ञ से यह प्रश्न पुछने पर उसका उत्तर होगा, अनंत, अपरिमीत, infinity! अनंत (Infinity) का अर्थ होता है जिसका कोई अंत न हो। इसको ∞ से निरूपित करते हैं।
यदि ∞ सबसे बड़ी संख्या है, तब ∞+1 का क्या ? क्या ∞ + 1 उससे बड़ी संख्या नही है ?
एक उदाहरण लेते है :
हिल्बर्ट का अनंत होटल (Infinity Hotel)
इस होटल मे अनंत कमरे है, सभी कमरे भरे हुये है अर्थात सभी कमरे मे यात्री ठहरे हुये हैं। आप सोचेंगे कि इस होटल मे एक और यात्री ठहरने आया तो किसी सीमित कमरे के होटल की तरह इस होटल मे उसे कमरा नही मिलेगा क्योंकि सभी कमरे मे यात्री ठहरे हुये है। लेकिन क्या यह सत्य है ?
मान लेते है कि हम कमरा 1 के यात्री को कमरा 2 मे भेजते है, कमरा 2 के यात्री को कमरा 3 मे। अर्थात किसी कमरा N के यात्री को कमरा N+1 मे भेज देते है। अब कमरा 1 रिक्त है। हम उस मे नये यात्री को ठहरा सकते है।
∞ + 1 =∞
यदि उस होटल मे दो नये यात्री आ गये तब क्या उन्हे कमरा मिलेगा ?
अब हम कमरा 1 के यात्री को कमरा 3 मे जाने कहेंगे। कमरा 2 के यात्री को कमरा 4मे…. कमरा N के यात्री को कमरा N+2 मे। अब हमारे पास कमरा 1,2 खाली है, जिसमे 2 यात्री आ जायेंगे।
∞ +2 =∞
यदि उस होटल मे अनंत नये यात्री आ गये तब क्या उन्हे कमरा मिलेगा ?
अब हम कमरा 1 के यात्री को कमरा 1+∞ मे जाने कहेंगे। कमरा 2 के यात्री को कमरा 2 + ∞ मे…. कमरा N के यात्री को कमरा N+∞ मे। अब हमारे पास ∞ कमरे खाली है, जिसमे ∞ यात्री आ जायेंगे।
गणित मे भगवान और अनंत के लिए कोई जगह नही है ?
चलते चलते एक और प्रश्न क्या ब्रह्माण्ड ∞ (अनंत) है ?






