नाभिकिय विकिरण कब हानीकारक होता है ?: कुछ तथ्य
जापानी नाभिकिय दुर्घटना : तथ्यो का अभाव और समाचारो की बाढ़
११ मार्च २०११ को जापान मे आये रिक्टर स्केल पर ९.० के भूकंप और भूकंप से उत्पन्न सुनामी से हुयी जान माल की हानी से सम्पूर्ण मानव जाति दुखी है। मानवता को हुयी इस क्षति के लिये ये दो कारक भूकंप और सूनामी काफी नही थे कि एक तीसरा संकट आ खड़ा हुआ। जापान के फुकुशीमा के नाभिकिय संयंत्र से नाभिकिय विकिरण का संकट पैदा हो गया है।
४० वर्ष पूराने फुकुशीमा के दायची नाभिकिय संयंत्र मे आयी इस गड़बड़ी का कारण वैकल्पिक सुरक्षा जनरेटर का काम ना करना है। यह वैकल्पिक सुरक्षा जनरेटर नाभिकिय संयंत्र को उसके काम ना करने की स्थिति मे ठंडा रखते है। ठंडा रखने का यह कार्य किसी शीतक को संयंत्र मे पंप कर किया जाता है, यह शीतक पानी भी हो सकता है। सामान्य स्थिति मे नाभिकिय संयत्र से उत्पन्न विद्युत ही उसे ठंडा करने के कार्य मे उपयोग की जाती है लेकिन रखरखाव के समय जब नाभिकिय संयत्र को बंद किया जाता है तब यह वैकल्पिक जनरेटर से उत्पन्न विद्युत ही संयत्र को ठंडा करने के कार्य मे उपयोग की जाती है। इन्ही वैकल्पिक सुरक्षा जनरेटरो को रखरखाव के अतिरिक्त आपातकालीन स्थिति मे प्रयोग किया जाता है।
ताराहुमारा : ४३५ मील मैराथन के धावक
रारामुरी या ताराहुमारा मेक्सीको के मूल निवासी है। रारामूरी का उनकी भाषा मे अर्थ “पैदल धावक” या “तेज धावक” होता है। ये लोग लंबी दूरी की दौड़ के लिये प्रसिद्ध है। इस जनजाति के धावक ४३५ मील तक की दौड़ एक बार मे पूरी करते हैं। यह दौड़ १० मैराथन के बराबर है। ४३५ मील की मैराथन २ दिन मे पूरी होती है और नदियो, दर्रो और घाटियो के मध्य से गुजरती है।
ताराहुमारा जनजाति के लोग इतनी लम्बी दूरी कैसे तय कर पाते है?
क्या मोबाईल फोन से कैंसर हो सकता है ?
मानव मन को चिंतित होने के लिये बस एक कारण चाहिये होता है। समस्या यह है कि चिंता करने के इन कारणो के अनगिनत श्रोत है और हम ऐसे कारणो से चिंतित होते रहते है जो कि चिंता का कोई कारण ही नही होते।
अतंरजाल पर , अखबारो मे ऐसा ही एक कारण आते रहता है कि मोबाईल फोन से कैंसर हो सकता है। शोध के बाद शोध और ऐसी अनगिनत शोधो के बाद भी कैंसर और मोबाईल फोन के बीच मे कोई रिश्ता नही पाया गया है। लेकिन लोगो की चिंता जारी है !
देखते है कि विशेषज्ञ क्या राय रखते है।








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