सितम्बर 19, 2011

स्टार ट्रेक मे टेलीपोर्टेशन
स्टार ट्रेक की कहानी एक अंतरिक्षयान यु एस एस एन्टरप्रायज के यात्राओं पर आधारित होती है। यह अंतरिक्षयान ब्रह्माण्ड की अनंत गहराईयों मे जीवन की खोज मे घूमता रहता है। जब इस की कहानी लिखी जा रही थी, तब अंतरिक्ष यान से किसी ग्रह पर जाने और वापिस आने के तरिको पर विचार किया जा रहा था। सबसे आसान उपाय राकेटो का था लेकिन राकेट के लांच होने और “एन्टरप्रायज” तक पहुंचने या “एन्टरप्रायज” से राकेट/शटल यान के निकलने और ग्रह तक पहुंचने के फिल्मांकन की परेशानीयाँ थी। यह फिल्मांकन तकनीकी रूप से संभव था लेकिन महंगा था। इस धारावाहिक मे लगभग हर एपिसोड मे इस तरह की राकेट/शटल यात्रा दिखाना बजट की रीढ़ तोड़े जा रहा था।
एंटरप्रायज अंतरिक्ष यान से इन छोटी यात्राओं के विकल्प के रूप मे टेलीपोर्टेशन को प्रस्तुत किया गया। टेलीपोर्टेशन का फिल्मांकन आसान था, कैप्टन किर्क एक बटन दबाते ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाते।
टेलीपोर्टेशन के कुछ उदाहरण धार्मिक कथाओं मे भी मीलते है। इन कथाओ मे कई ऐसे प्रसंग है जिसमे देवता एक स्थान पर अंतर्धान हो कर दूसरे स्थान पर प्रकट होते है। थीयासोफीकल सोसायटी के मानने वालो के अनुसार कुछ सिद्ध पुरुष जिन्हे वे ’महात्मा’ कहते है, ’टेलीपोर्टेशन’ की क्षमता रखते है। परमहंस योगानंद की पुस्तक “आटोबायोग्राफी आफ़ ए योगी“ मे भी कुछ स्थानो पर टेलीपोर्टेशन का वर्णन है।
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सितम्बर 14, 2011

स्टार ट्रेक का अंतरिक्ष यान (यु एस एस एंटरप्रायज)
विज्ञान फतांसी कथायें सामान्यतः ऐसी कल्पित कहानियाँ होती है,जिसकी घटनाये वैज्ञानिक आधार पर संभव होती हैं और वे विज्ञान के मूलभूत नियमो का उल्लंघन नही करती हैं। इन कथाओं का घटनाक्रम भविष्य, भविष्य का विज्ञान और तकनिकी ज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा अथवा परग्रही प्राणीयों पर केन्द्रित होता है। कभी कभी वैज्ञानिक आविष्कारों के परिणामो का अध्ययन भी इन कथाओं का उद्देश्य होता है।
विज्ञान गल्प मे तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत समांतर विश्व या भविष्य का भी समावेश होता है। यह जादुई या तिलस्मी कहानीयों के जैसे ही लेकिन भिन्न होती है क्योंकि इस गल्पो की घटनायें वैज्ञानिक आधार पर संभव होती है। इन कहानीयों का घटनाक्रम और पात्र काल्पनिक होते है लेकिन वे विज्ञान के मूलभूत नियमों का पालन करते है।
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मार्च 22, 2011

नाभिकिय विकिरण(बड़ा करके देखने के लिए चित्र पर क्लीक करें !)
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दिसम्बर 13, 2010
मानव मन को चिंतित होने के लिये बस एक कारण चाहिये होता है। समस्या यह है कि चिंता करने के इन कारणो के अनगिनत श्रोत है और हम ऐसे कारणो से चिंतित होते रहते है जो कि चिंता का कोई कारण ही नही होते।
अतंरजाल पर , अखबारो मे ऐसा ही एक कारण आते रहता है कि मोबाईल फोन से कैंसर हो सकता है। शोध के बाद शोध और ऐसी अनगिनत शोधो के बाद भी कैंसर और मोबाईल फोन के बीच मे कोई रिश्ता नही पाया गया है। लेकिन लोगो की चिंता जारी है !
देखते है कि विशेषज्ञ क्या राय रखते है।
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दिसम्बर 7, 2010
बोइंग एक्स ३७ अमरीकी मानवरहित अंतरिक्षयान है। यह अमरीकी वायु सेना द्वारा पृथ्वी की कक्षा मे पुनःप्रयोग किये जाने वाली तकनिको के प्रदर्शन मे उपयोग मे लाया गया है। इसकी लंबाई ८.९ मीटर है और इसमे पिछले हिस्से मे दो पंख लगे है।
अमरीका ने इस यान को गोपनिय रखा था लेकिन विश्व भर मे फैले शौकिया खगोल विज्ञानियो(Amateur Astronomers) ने इसे पृथ्वी की कक्षा मे देख लिया। शौकिया खगोल विज्ञानियो के अनुसार इस यान का लक्ष्य अंतरिक्ष से निगरानी तथा सैनिक सर्वेक्षण है। उनके अनुसार एक्स ३७बी उत्तर कोरीया, अफगानीस्तान के उपर से गुजरा था तथा यह यान हर चार दिनो मे उसी स्थान से गुजरता है। इस यान की कक्षा ४१० किमी है जो कि सैनिक सर्वेक्षण उपग्रहो की होती है।
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