Posts tagged ‘Alpha Particle’

अप्रैल 23, 2012

सरल क्वांटम भौतिकी : कण त्वरक तथा जांचक (Particle Accerator and Detectors)

by आशीष श्रीवास्तव

इस ब्लाग पर हमने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति , उसे बनाने वाले मूलभूत तत्वो, घटको की खूब चर्चा की है। हम जानते है कि हमारा दृश्य विश्व, हमारी आकाशगंगा, हमारी धरती और हम स्वयं किससे निर्मित है। लेकिन हम यह सब कैसे जानते है ? इस प्रमाण क्या है ? क्या हमने इसे प्रायोगिक रूप से प्रमाणित किया है या केवल गणितीय/दार्शनिक तुक्के हैं ?

हम यह सब कैसे जानते है ?

सिद्धांत और वास्तविकता

सिद्धांत और वास्तविकता

इस ब्लाग पर हम भौतिकी के विभिन्न आयामो, जिसमे से एक प्रमुख स्तंभ स्टैंडर्ड माडेल की चर्चा करते रहें है। स्टैंडर्ड माडेल विचित्र नामो वाले नन्हे, अदृश्य परमाण्विक कणो के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करता है। यह सभी वैज्ञानिक सिद्धांत “एलीस इन वंडरलैण्ड” के जादुई विश्व के जैसे लगते है, लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि भौतिकशास्त्र मे किसी कमरे मे बैठकर कहानीयाँ नही गढी़ जाती है। इस विज्ञान मे विभिन्न अवधारणाओं को प्रयोगशाला मे जांचा परखा जाता है, उसके परिणामों के आधार पर सिद्धांत गढे़ जाते है।

सिद्धांतो की जांच-परख के लिये वैज्ञानिक प्रयोग करते है, इन प्रयोगो मे वे ज्ञात सूचनाओं के प्रयोग से अज्ञात को जानने का प्रयास करते हैं। ये प्रयोग सरल आसान से लेकर जटिल तथा विशाल भी हो सकते है।

स्टैंडर्ड माडेल मानव के पिछले हजारो वर्षो के वैज्ञानिक अन्वेषण पर आधारित है लेकिन हमारी कण-भौतिकी के हमारी वर्तमान अवधारणाओं को आकार देने वाले अधिकतर प्रयोग हाल में ही घटित हुयें है। कण भौतिकी के सिद्धांतो की जांच प्रयोग की कहानी पिछले सौ वर्षो से भी कम समय पहले से प्रारंभ हुयी है।

अप्रैल 2, 2012

सरल क्वांटम भौतिकी: रेडियो सक्रियता क्यों होती है?

by आशीष श्रीवास्तव

पिछले भाग मे हमने अस्थायी या अस्थिर परमाणु केन्द्रक से संबंधित कुछ प्रश्न देखे थे :

  1. भारी परमाणु केन्द्रक अस्थायी क्यों होता है?
  2. किसी परमाणु केन्द्रक का किसी प्रायिकता(Probability) के आधार पर क्षय क्यों होता है ?
  3. परमाणु केन्द्रक के क्षय मे द्रव्यमान का भी क्षय होता है, यह द्रव्यमान कहाँ जाता है ?

इस भाग मे हम इन प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करेंगे।

परमाणु केन्द्र के अंदर एक नजर

परमाणु विखंडणरस्सी और स्प्रिंगप्रोटान धनात्मक रूप से आवेशित होते हैं और विद्युत रूप में एक दूसरे के प्रतिकर्षित करते हैं। परमाणु केन्द्र ग्लुआन कणों के कारण बंधा रहता है अन्यथा वह बिखर जायेगा। इस प्रभाव को ही अवशिष्ट मजबूत नाभिकीय बल कहते हैं।

अब आप परमाणु केन्द्रक को एक स्प्रिंग के जैसे समझे, इस स्प्रिंग में जो तनाव है वह विद्युत प्रतिकर्षण है। इस स्प्रिंग हो एक बड़ी रस्सी से दबाकर बांधा गया है जो कि अवशिष्ट मजबूत नाभिकीय बल है। स्प्रिंग में काफी सारी ऊर्जा है लेकिन वह ऊर्जा बाहर नहीं आ सकती क्योंकि रस्सी बहुत मजबूत है।

यदि आपने इस श्रृंखला के प्रारंभिक लेख नही पढ़े है, तो आगे बढ़ने से पहले उन्हे पढ़ें।

  1. मूलभूत क्या है ?
  2. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 1?
  3. ब्रह्माण्ड किससे निर्मित है – भाग 2?
  4. ब्रह्माण्ड को कौन बांधे रखता है ?
  5. परमाणु को कौन बांधे रखता है?
  6.  नाभिकिय बल और गुरुत्वाकर्षण
  7. क्वांटम यांत्रिकी
  8. कणों का क्षय और विनाश